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कानपुर में पुलिस कमिश्नरी: अपराध-भ्रष्टाचार पर अंकुश हैं चुनौतियां, पुलिस ने इन वारदातों में कराई थी किरकिरी

Sat, 27 Mar 2021 12:25 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- पुलिस ने बिकरू और संजीत अपहरण हत्याकांड जैसी वारदातों ने कराई थी किरकिरी
- कमिश्नरी लागू होने के बाद ऐसी वारदातें रोकना चुनौती
- थाना स्तर पर भ्रष्टाचार रोकना भी बड़ी चुनौती
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यूपी पुलिस
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विस्तार
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कानपुर में पुलिस कमिश्नरी लागू करने के पीछे शासन का मकसद यही है कि अपराध और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगे, लेकिन किसी चुनौती से कम नहीं। पिछले एक साल में बिकरू और संजीत अपहरण हत्याकांड ने शहर पुलिस की बड़ी फजीहत कराई। ऐसे में पुलिस कमिश्नरी के सामने चुनौती होगी कि बड़ी वारदातों को कैसे काबू किया जाए। इसमें सबसे अहम थाना स्तर पर पुलिसकर्मियों की निगरानी भी होगी।
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चुनौती : 01
अपराधियों से मिलीभगत और लापरवाही

जुलाई 2020 में बिकरू कांड में आठ पुलिसकर्मी शहीद हुए। उसी दौरान बर्रा में संजीत अपहरण हत्याकांड हुआ। दोनों वारदातों की जांच हुई तो पुलिस अफसरों की बड़ी लापरवाही सामने आई। उनकी गलतियों से दोनों कांड हुए। कुछ अफसरों में अनुभव की कमी और अपराधियों के साथ कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत ने पुलिस की किरकिरी कराई। तब सवाल उठा था कि अगर कानपुर में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली होती तो शायद ऐसी वारदातें न होतीं। वजह यह कि पुलिस कमिश्नरी में उच्चाधिकारियों के हाथों में शहर की कमान होती है। निगरानी के लिए अफसर अधिक होते हैं। अब यहां ये व्यवस्था लागू हो गई है। ऐसे में पुलिस अफसरों से अपेक्षाएं ज्यादा होंगी और उनके सामने बड़ी वारदातों को भांपने की चुनौती। वहीं अपराधियों से सांठगांठ करने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी जरूरी होगी।

चुनौती : 02
आसान नहीं भ्रष्टाचार पर लगाम

पुलिस अफसरों के पास आए दिन दरोगा, सिपाहियों की शिकायतें पहुंचती हैं। खासकर पैसों से लेनदेन और घूसखोरी की। दिव्यांग महिला से डीजल भरवाने के नाम पर भी दरोगाओं ने पैसों की वसूली की थी। एक एसओ चोरी की कार में सवारी कर महकमे की भद्द पिटवा ही चुके हैं। ऐसे तमाम आरोप पुलिस पर लगे। कमिश्नरी में तैनात अफसरों के लिए पुलिसकर्मियों के भ्रष्टाचार पर लगाम कसना भी आसान नहीं होगा।
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चुनौती : 03
कार्यशैली और व्यवहार सुधारना

थाने स्तर पर पुलिसकर्मी पीड़ितों से दुर्व्यवहार करते हैं। पिछले कई महीनों में इस संबंध में कई ऑडियो-वीडियो भी पुलिसकर्मियों के वायरल हुए हैं, जिन पर कार्रवाई भी हुई। रिश्वतखोरी तो चरम पर है। कमिश्नरी लागू होने के बाद ऐसे पुलिसकर्मियों की कार्यशैली और व्यवहार सुधारना किसी चुनौती से कम नहीं होने वाला।

चुनौती : 04
लंबे समय से जमे थानेदार बने ठेकेदार

कानपुर में कुछ इंस्पेक्टर और एसओ लंबे समय से थानेदारी कर रहे हैं। समय-समय पर आसपास के थानों में उनकी पोस्टिंग होती रही है। कुछ तो ऐसे हैं, जो करीब एक साल से एक ही थाने में जमे हैं। कोई जमीन का सौदा करा रहा है तो कोई भूमाफिया को कब्जा दिलवा रहा। कई दागदार इंस्पेक्टर और एसओ भी चार्ज पर हैं। पुलिस कमिश्नरी के अफसरों के सामने इन थानेदारों पर शिकंजा कसने की भी चुनौती होगी।

चुनौती: 05
महिला अपराध पर अंकुश लगाना 

कानपुर में महिला अपराध लगातार बढ़ रहा है। कुछ दिन पहले सजेती में किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म की वारदात हुई। बुधवार रात बर्रा में युवती के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी गई। इसी तरह आए दिन महिला अपराध हो रहे हैं। महिला सुरक्षा का मुद्दा भी कमिश्नरी के लिए अहम होगा।
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