यूपी के फतेहपुर जिले में वन विभाग और लखनऊ एसटीएफ की टीम ने जिले में कछुआ तस्करी के गिरोह का भंडाफोड़ किया है। सूचना पर शनिवार की सुबह कटोघन टोल प्लाजा के पास खागा में एक ट्रक व दो आरोपी पकड़े गए। कुल 21 बोरे में कछुए मिले। इन्हें मैनपुरी से ट्रक से पश्चिम बंगाल ले जाया जा रहा था। वन विभाग ने पकड़े गए दो अभियुक्तों के खिलाफ वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत रिपोर्ट दर्ज की है।
कछुआ तस्कर मैनपुरी से 21 बोरे में कछुवों को भर कर ट्रक से पश्चिम बंगाल ले जा रहे थे। डीएफओ सीपीएस मलिक ने बताया कि वन विभाग परिसर में बोरों में भरे कछुओं की गिनती की गई। इसमें कुल 447 कछुए मिले। हालांकि इनमें 57 कछुए मर गए थे। इनमें तीन सुंदर प्रजाति के बड़े कछुए भी हैं। 21 बोरों में करीब साढ़े आठ क्विंटल कछुए बरामद हुए है। बरामद कछुवों की कीमत करीब पांच लाख रुपये बताई जा रही है।
तस्कर के कुछ साथी ट्रेन से जा रहे
वन विभाग में पकड़े गए कछुए व अभियुक्त के साथ डीएफओ व एसटीएफ की टीम
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पकड़े गए अभियुक्त में सरगना मैनपुरी निवासी सुनील पुत्र रघुवीर और ट्रक चालक पश्चिम बंगाल निवासी अशोक को पकड़ा गया है। छापेमारी में एसडीओ वन पीएन राय, वन दरोगा छत्रपाल सिंह, मयंक पटेल, शिवराम सिंह यादव भी रहे। डीएफओ ने बताया कि दोनों अभियुक्तों के खिलाफ वाइल्ड लाइफ एक्ट की धारा में रिपोर्ट लिखी गई है। दोनों को कोतवाली में बंद रखा जाएगा। इसके बाद दोनों को सीजेएम कोर्ट में पेश कर जेल भेजेंगे। लखनऊ से मेडिकल टीम आकर जख्मी कछुवों का इलाज कर रही है। इसके बाद इन कछुओं को गंगा नदी में छोड़ दिया जाएगा।
डीएफओ सीपीएस मलिक ने बताया कि पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया है कि उनके दो-तीन साथी ट्रेन से पश्चिम बंगाल जा रहे हैं। हालांकि इसकी जानकारी पश्चिम बंगाल पुलिस को भी दी जा रही है। अभियुक्तों से पूछताछ में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि काफी समय से यह लोग कछुआ तस्करी का काम कर रहे थे। बताया कि प्रतिबंधित कछुआ बेचने पर सात वर्ष के कारावास का प्रावधान है।