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आईआईटी की जांच में बड़ा खुलासा: एसटीपी में ठीक से शोधित नहीं हो रहा जहरीला पानी

Thu, 11 Mar 2021 01:28 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गूगल
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कानपुर के जाजमऊ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में टेनरियों से आ रहे जहरीले पानी का ठीक से शोधन नहीं हो रहा है। शोधित पानी में मानक से कई गुना ज्यादा क्रोमियम सहित अन्य प्रदूषणकारी तत्व मिले हैं। बिनगवां एसटीपी के शोधित पानी में भी प्रदूषण कई गुना ज्यादा मिला।
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यह खुलासा आईआईटी, कानपुर की जांच में हुआ। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई को नोटिस दी है। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. एके माथुर के अनुसार बोर्ड ने 8 फरवरी को जाजमऊ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में शोधन के बाद नहर (सिंचाई चैनल) में छोड़े जा रहे पानी का नमूना लिया था जिसकी जांच में  निर्धारित मानकों से ज्यादा तत्व पाए गए हैं। इससे पहले भी जांच में इन दोनों प्लाटों में शोधित किए गए गंदे पानी में गंदगी मानकों से ज्यादा मिली थी। 

इतना मिला                                                     इतना होना चाहिए
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बीओडी (बायो डिजाल्व आक्सीजन) 114 मिलीग्राम प्रतिलीटर                                                     30 मिलीग्राम 

सीओडी (केमिकल आक्सीजन डिमांड) 320 मिलीग्राम प्रति लीटर                                                      250 मिलीग्राम 

टीएसएस (टोटल सस्पेंडेंट साल्ट) 74 मिलीग्राम प्रति लीटर                                                      100 से कम

टोटल क्रोमियम 3.12 मिलीग्राम प्रति लीटर                                                     2 मिलीग्राम 

(उसी दिन बिनगवां एसटीपी में लिए गए नमूनों की जांच में सीओडी 66 मिलीग्राम प्रति लीटर, बीओडी 360 मिलीग्राम प्रति लीटर पाया गया था)

क्रोमियमयुक्त पानी से सिंचाई करने से सब्जियों में भी जहरीले तत्व आ जाते हैं। लंबे समय तक ऐसी सब्जी खाने से कई घातक बीमारियां हो सकती हैं। ऐसा पानी पीने वाली गाय, भैंस का दूध भी हानिकारक होता है। - डॉ. संजीव सचान, सब्जी वैज्ञानिक, सीएसए

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