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जहरीली शराब: यहां आबकारी की मक्कारी और 'जहर से यारी' ने ली कई जानें 

Tue, 22 May 2018 11:27 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार

आबकारी अफसरों के नकारेपन से फल-फूल रहा नकली शराब का धंधा
 
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डेमाे पिक
जहरीली शराब कांड से पूरे यूपी में कोहराम मचा हुआ है। इसमें अब तक दर्जन भर से अधिक जानें जा चुकी हैं। साथ ही भारी संख्या में लोग गंभीर रूप से बीमार होकर अस्पताल में भर्ती हैं। जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। इस मामले में आबकारी अफसरों की भारी चूक सामने आई है। 
 
 
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डेमाे पिक
कानपुर में पुलिस और एसटीएफ ने तमाम बार नकली शराब की फैक्ट्रियां और शराब में प्रयुक्त होने वाला खतरनाक रसायन (रेक्टीफायड लिकर) पकड़ा है, लेकिन आबकारी अफसरों ने कभी इन्हें पकड़ने की जहमत नहीं उठाई और न ही बड़ी रिकवरी की। और तो और पकड़ी गई फैक्ट्रियों की जांच तक करना मुनासिब नहीं समझा। आबकारी अफसरों के इसी नकारेपन की फसल है जहरीली शराब, जिसने कानपुर नगर और देहात में 12 लोगों की जान ले ली।
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डेमाे पिक
शराब कारोबार से जुड़े एक शख्स का कहना है कि आबकारी अफसर और कर्मचारियों का ध्यान सिर्फ कमाई में रहता है। क्षेत्रीय से लेकर जिला अफसर और उससे ऊपर तक सरकारी शराब की दुकानों व ठेकों से महीना तय है। दुकान की बिक्री के हिसाब से रकम पहुंचाई जाती है। यही वजह है कि आबकारी अफसर शराब, बीयर और देशी शराब की दुकानों में चेकिंग के नाम पर केवल औपचारिकता निभाते हैं।
 
 

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शराब कांड
अफसर दुकान व ठेके का स्टॉक और रजिस्टर का मिलान भी अपने तरीके से करते हैं। यही वजह है कि सचेंडी और रूरा के सरकारी ठेकों में नकली और गैर प्रांत की शराब बिक रही थी, लेकिन आबकारी अफसर इससे अनजान रहे। इसका खुलासा सचेंडी के दूल गांव के ठेके से मिली एक्सपायरी डेट और मिलावटी व नकली शराब की बरामदगी से हुआ है।
 
 
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इसी क्षेत्र के बिनौर में महेश सिंह के ठेके से तो उत्तराखंड की शराब और एक्सपायरी डेट (मार्च 2018) की 30 पेटी माधुरी की 42 नंबर बैच की शराब बरामद हुई। इसके अलावा माधुरी शराब के रैपर, बोतल के ढक्कन व  अन्य सामान भी बरामद हुआ है, जिससे साफ है कि महेश के तार नकली शराब बनाने वालों से भी जुड़े हैं। रूरा में भी सरकारी ठेके पर नकली और जहरीली शराब बरामद हुई है।
 
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एसटीएफ ने किए बड़े खुलासे, पुलिस लीपापोती में जुटी 

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आबकारी विभाग के अफसरों से उलट यूपी एसटीएफ (स्पेशल टॉस्क फोर्स) बड़े खुलासे किए हैं। नकली शराब बनाने वाले गैंग से जुड़े कई लोगों को जेल भी भेजा है। एसटीएफ की स्थानीय इकाई ने 26 दिसंबर-2017 को सचेंडी इलाके में एक डीसीएम को पकड़ा था। उसमें 100 ड्रम रेक्टीफायड लिकर के साथ गन्नौर, सोनीपत के साहिल और इमरान को गिरफ्तार किया था। यह लोग यूपी और बिहार में अवैध शराब आपूर्ति करते थे। यह लोग प्रधान जी नाम के शख्स को लिकर की आपूर्ति देने यहां आए थे। तब एसटीएफ ने माना था कि बरामद लिकर से 16 हजार 500 लीटर शराब बन सकती थी। फिर इसे नकली रैपर, होलोग्राम और ढक्कन लगाकर पैक कर असली के रूप में सरकारी दुकानों में सप्लाई किया जाता। प्रधान को एफआईआर में नामजद किया गया था, लेकिन प्रधान कौन है और कहां का रहने वाला है। इसका पुलिस अभी तक सुराग नहीं लगा सकी है।  
 
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चर्चा है कि पुलिस ने प्रधान का नाम विवेचना से बाहर कर दिया है। इसी तरह ट्रांसपोर्ट नगर में एक ट्रांसपोर्टर के गोदाम में छापा मारकर एसटीएस ने भारी मात्रा में अंग्रेजी, देशी शराब के रैपर, ढक्कन व नकली सामान बनाने में प्रयोग होने वाला अन्य सामान बरामद किया था। इस मामले में भी कई आरोपी फरार हैं। एसटीएफ ने नौबस्ता, चकेरी और कानपुर देहात से भी भारी मात्रा में रेक्टीफायड लिकर बरामद किया था। इसके अलावा पुलिस ने पिछले साल शहर में पनकी, नौबस्ता, कल्याणपुर, चकेरी में छापेमारी कर आठ स्थानों से नकली शराब बनाने की फैक्ट्री पकड़ी थी।
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