गोपाल दास नीरज का दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में निधन
लिखे जो खत तुझे...,
ये भाई जरा देख के चलो..., मेघा छाए आधी रात.. जैसे सदाबहार नगमों के रचयिता यूपी के लाल गोपाल दास नीरज का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वो 93 वर्ष के थे और काफी समय से बीमार थे।
साहित्यकार, शिक्षक व दिल को छू लेने वाली कविताओं के लेखक, यूपी के इटावा निवासी गोपालदास नीरज ने हिंदी साहित्य को एक नई जान दी। नीरज जी जब मंच से अपनी कविताएं सुनाते थे तो उनकी नशीली कविताएं और लरजती आवाज श्रोताओं को अपना दीवाना बना देती थी। अब के सावन में शरारत ये मेेरे साथ हुई, मेरा घर छोड़ कर सारे शहर में बरसात हुई... सुनकर तो श्रोता सावन की तरह झूम उठते थे।