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Kanpur News: घटकर 20 फीसदी पहुंचा प्लास्टिक उत्पादन, दो फैक्टरी बंद

Sat, 21 Mar 2026 01:01 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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रनियां (कानपुर देहात)। ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर अब स्थानीय उद्योगों पर साफ दिखाई देने लगा है। रनियां और जैनपुर क्षेत्र के उद्यमियों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। कच्चे माल की आपूर्ति बाधित होने और कीमतों में बढ़ोतरी के चलते अधिकांश उद्योग केवल 20 प्रतिशत क्षमता पर संचालित हो रहे हैं। जनपद की दो प्लास्टिक फैक्टरियां बंद हो गई हैं। उद्यमियों के अनुसार कई फैक्टरियां बंद होने की कगार पर हैं। कई इकाइयों में गिने-चुने मजदूरों के सहारे काम चलाया जा रहा है।
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रनियां और जैनपुर सहित औद्योगिक क्षेत्र में छोटी-बड़ी करीब 400 फैक्टरी हैं। जिसमें करीब 100 से 125 प्लास्टिक के उद्योग संचालित हैं। कच्चे माल की कीमतों में तेजी से उछाल और आपूर्ति बाधित होने से रनियां और जैनपुर औद्योगिक क्षेत्रों के उद्यमियों को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। सबसे अधिक संकट प्लास्टिक उद्योग पर है। प्लॉस्टिक दाने के दाम ढाई गुना तक बढ़ गए हैं। उद्यमियों के अनुसार पीवीसी पाइप बनाने में इस्तेमाल होने वाला दाना ढाई गुना महंगा हो गया है।
इसके अलावा उत्पादन में उपयोग होने वाले केमिकल के दाम भी कई गुना बढ़ गए हैं। महंगे कच्चे माल के कारण उत्पादन लागत बढ़ने से तैयार माल के दाम भी बढ़े हैं। इससे बाजार में मांग घट गई है और नए ऑर्डर मिलना कम हो गए हैं। उद्यमियों के अनुसार पीवीसी प्लास्टिक बनाने वाली फैक्टरी दो दिन पहले बंद हो गई थी। की फैक्टरियों में गिने-चुने मजदूरों के सहारे काम संचालन किया जा रहा है। कई इकाइयों में 20 प्रतिशत उत्पादन रह गया है। उद्यमियों ने बताया कि यदि जल्द हालात नहीं सुधरे तो बड़ी संख्या में उद्योग पूरी तरह बंद हो सकते हैं। जिससे रोजगार पर भी गहरा संकट खड़ा हो जाएगा।
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इनसेट

रोजगार पर मंडरा रहा खतरा

उद्योगों में उत्पादन घटने का सीधा असर मजदूरों पर पड़ रहा है। कई इकाइयों में पहले जहां दो शिफ्ट में काम होता था अब वहां एक शिफ्ट मुश्किल से चल पा रही है। मजदूरों की संख्या लगातार कम की जा रही है। पेट्रोलियम प्रोडक्ट बढ़ने से नमकीन भराई में जो प्लास्टिक का प्रयोग किया जाता है। उसके रेट आसमान छू रहे है। पहले रैपर 225 रुपये था वह अब 305 रुपये में मिल रहा है। ऐसी स्थित में फैक्टरी चलाना संभव नहीं है। - संजय गुप्ता, उद्यमी
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डंप माल से 20 फीसदी रह गया उत्पादन
कच्चे का माल मिलना दूभर हो गया हुआ। मुट्ठी भर रुपये देने के बाद भी रॉ मटेरियल नहीं मिल पा रहा है। डंप माल से अब 20 प्रतिशत उत्पादन रह गया है। फैक्टरियां ठप होने की कगार पर है। कई फैक्टरी संचालकों ने अपनी शिफ्ट बंद कर दी है। कुछ ने मजदूरों को भी घर भेज दिया है। यही हालत रहे तो उद्यमों पर ताला लटकने लगेंगे। - मनोज चौरसिया, उद्यमी
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केमिकल, दाना का संकट, बंद कर दी फैक्टरी
फैक्टरी में बोरिंग पाइप बनाए जाते हैं। पाइप बनाने में मिश्रित होने वाली केमिकल की फैक्टरियां विदेशों में बंद हो गई है। इस कारण केमिकल मिलना मुश्किल है। स्टॉक में रखे केमिकल और दाने का प्रयोग कर प्लांट चार से पांच मजदूरों के सहारे चल रहा था। उसे भी बंद करना पड़ा है। फैक्टरी से प्रतिमाह 17 से 18 लाख का उत्पादन होता है। फैक्टरी बंद करने पर श्रमिकों को मजदूरी देना व खर्चे निकालना मुश्किल है। - राजेश शरीम, उद्यमी

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फैक्टरी में पीवीसी प्लास्टिक के पाइप बनाए जाते हैं। एक माह में करीब 15 से 20 लाख का उत्पादन होता है। इसी से बिजली का बिल और मजदूरी देनी पड़ती है लेकिन अब यह स्थिति नहीं है। फैक्टरी को बंद कर दिया गया है। कच्चा माल सस्ता होने के बाद दोबारा संचालित किया जाएगा। यह स्थिति कोरोना काल जैसी हो गई है। उद्यमी पूरी तरह से टूट चुका है। - आशीष पांडेय, उद्यमी
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