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Kanpur News: पौधों को मिला नहीं प्रयासों पर फिरा पानी

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इटावा। इस बार भी पौधरोपण अभियान में वन विभाग के अलावा 21 विभागों को अलग से साढ़े 24 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य मिला था। इसे पूरा करने के लिए विभागों ने पूरी ताकत लगाई, लेकिन इन पौधों की रक्षा के लिए रुचि न लेने से लगभग आधे पौधे भी विभाग नहीं बचा सके। कहीं पौधे सूख गए हैं तो ट्री गार्ड ही उखड़ गए हैं।
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जून में पौधरोपण अभियान चलाया गया था। इसके तहत वन विभाग ने स्वयं 40 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था, जबकि अन्य करीब 21 विभागों को 2457797 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य दिया था। सभी ने पौधे लगाने में रुचि भी दिखाई। विभागीय अधिकारियों की सख्ती के चलते कर्मचारियों ने अधिक से अधिक पौधे लगाकर शत प्रतिशत लक्ष्य को तो छू लिया, लेकिन सभी इसकी देखभाल करना भूल गए। वर्तमान में वन विभाग की ओर से लगाए गए करीब 70 प्रतिशत पौधे तो जीवित हैं, लेकिन अन्य विभागों के आधे भी पौधे जीवित नहीं बचे हैं। कहीं से पूरी तरह पौधे गायब हो गए हैं तो कहीं सिर्फ सूखी लकड़ियां रह गई हैं।





शहर के बलराम सिंह चौराहे से लेकर ईदगाह तिराहे तक सड़क किनारे ईंटों के आठ ट्री गार्ड लगे हुए थे। जून-जुलाई में चले अभियान के बीच यहां माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अभियान में हिस्सा लेकर पौधे रोपे थे, लेकिन वर्तमान में यहां लगभग सभी पौधे सूख चुके हैं। ट्री गार्ड भी देखरेख के अभाव में टूट चुके हैं।
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प्रत्येक ग्राम पंचायत में ढाई-ढाई हजार पौधे लगाए गए। इसमें स्कूलों में, व्यक्तिगत लोगों ने व ग्राम प्रधान व मनरेगा ने सरकारी जमीन पर पौधे लगाए। बम्हनीपुर ग्राम पंचायत के सरकारी खलिहान की जमीन पर ही अकेले 400 पौधों का रोपण किया गया। पांच माह बाद बिना देखरेख के सभी पौधे सूख गए। बीडीओ राजकुमार शर्मा बताया कि संबंधित पंचायत को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण लिया जायेगा।



उदी भरेह मार्ग पर जून-जुलाई में चकरनगर से लेकर उदी तक सड़क किनारे बने ईंटों के ट्री गार्ड में वन विभाग की ओर से पौधे लगवाए गए थे। बड़ी संख्या में पौधे देखरेख के अभाव में सूख चुके हैं। हालांकि विभागीय अधिकारियों का दावा है कि वन विभाग के सिर्फ 20 से 30 प्रतिशत ही पौधे सूखे हैं। अन्य सुरक्षित हैं।




पौधे लगाने के साथ ही सभी विभागों को पौधों का संरक्षण करने का भी निर्देश दिया गया था। वन विभाग के तो 60-70 प्रतिशत पौधे सुरक्षित हैं। अन्य विभागों के पौधे यदि मानक से ज्यादा खराब हुए हैं तो इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
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- अतुलकांत शुक्ला, डीएफओ
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