कानपुर। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) घरेलू क्रिकेट में बेहतर नतीजों के लिए अपने कोचिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। 2026-27 सत्र से रणजी ट्रॉफी समेत विभिन्न आयु वर्ग की टीमों के लिए अलग-अलग मुख्य कोच और सपोर्ट स्टाफ नियुक्त करने की तैयारी है। इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला 30 सितंबर को कानपुर में होने वाली यूपीसीए की वार्षिक आम सभा (एजीएम) में लिया जाएगा।
यूपीसीए का सबसे अधिक जोर इस बार रेड बॉल क्रिकेट को मजबूत करने पर है। एसोसिएशन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार यूपी ने करीब दो दशक पहले अपना एकमात्र रणजी ट्रॉफी खिताब जीता था। नई व्यवस्था में रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी, अंडर-23 कर्नल सीके नायडू ट्रॉफी और अंडर-19 कूच बिहार ट्रॉफी के लिए अलग कोचिंग यूनिट बनाए जाने की योजना है। इसका उद्देश्य हर टीम की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षण, रणनीति और खिलाड़ियों के विकास पर अलग से काम करना है।
पूर्व तेज गेंदबाज आशीष विंस्टन जैदी को रणजी टीम का गेंदबाजी कोच बनाए जाने की संभावना है। जैदी ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 378 विकेट हासिल किए हैं। वहीं सात हजार से अधिक प्रथम श्रेणी रन बनाने वाले पूर्व बल्लेबाज रिजवान शमशाद को अंडर-23 टीम की जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। पूर्व भारतीय ऑलराउंडर ज्ञानेंद्र पांडेय भी प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं। पिछले सत्र में उनकी देखरेख में यूपी की अंडर-23 टीम स्टेट ए ट्रॉफी की उपविजेता रही थी। पांडेय के प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 500 से अधिक रन और 165 विकेट हैं। इसके अलावा पूर्व भारतीय क्रिकेटर गोपाल शर्मा को विभिन्न टीमों के लिए सलाहकार की भूमिका सौंपे जाने की संभावना है। गोपाल शर्मा ने भारत के लिए पांच टेस्ट और 24 एकदिवसीय मैच खेले हैं। यूपीसीए का मानना है कि अलग-अलग टीमों के लिए समर्पित कोचिंग स्टाफ होने से खिलाड़ियों को बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा और जूनियर से सीनियर स्तर तक प्रतिभाओं को तैयार करने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।