चंबल के बीहड़ों से संसद तक पहुंचने वाली दस्यु सुंदरी फूलन देवी के बारे में कई किताबें लिखी गईं। बॉलीवुड की सबसे चर्चित फिल्म ‘बैंडिट क्वीन’ रिलीज हुई और तमाम बायोपिक डाक्युमेन्ट्री बनीं लेकिन उनके बचपन से जुड़े कई ऐसे रोचक किस्से हैं जिनके बारे में शायद कम ही लोग जानते होंगे। फूलन की शादी ग्यारह साल की उम्र में हुई थी लेकिन उनके पति पुत्तीलाल और पुत्तीलाल के परिवार ने उन्हें छोड़ दिया था। फूलन देवी के पहले पति पुत्ती लाल की उम्र करीब 75 साल है।
पुत्तीलाल ने बताईं कई चौंकाने वाली बातें....
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बैंडिट क्वीन फिल्म में पुत्तीलाल का रोल निभाने वाले कलाकार आदित्य श्रीवास्तव और दूसरी फोटो असली पुत्तीलाल
पुत्तीलाल काफी वृद्ध हो चुके हैं और उन्हें ठीक से नहीं याद है कि किस साल में उनकी शादी फूलन देवी से हुई थी। पुत्तीलाल के मुताबिक सत्तर के दशक के आसपास उनकी शादी हुई थी। कुछ सालों तक फूलन देवी उनके साथ रहीं। पुत्तीलाल ने कहा कि अब बीहड़ों में पहले जैसी दहशत नहीं रहती। एक समय था जब फूलन देवी के नाम से पूरा इलाका थर्राता था। फूलन देवी मायके से ही डकैत बनकर आई थी।
जानें फूलन देवी के बारें में...
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फूलन देवी की समर्पण को जाते हुए खींची गई तस्वीर
अपनी छोटी सी जिंदगी में फूलन देवी ने तमाम दुख झेले। यही वजह थी यूपी के एक छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाली फूलन देवी पूरी दुनिया में चर्चित हो गई। फूलन ने 14 फरवरी के दिन 20 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था, बदला लेने के बाद फूलन अपने जैसी तमाम महिलाअाें के लिए मसीहा बन गईं। जुर्म की दुनिया छाेड़कर लाेगाें ने इन्हें संसद तक पहुंचाया।
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फूलन देवी
फूलन देवी का जन्म उत्तर प्रदेश के जालौन के पास बने एक गांव पूरवा में 1963 में हुआ था। इसी गांव से फूलन कहानी भी शुरू होती है। जहां वह अपने मां-बाप और बहनों के साथ रहती थी। कानपुर के पास स्थित इस गांव में फूलन के परिवार को मल्लाह होने के चलते ऊंची जातियों के लोग हेय दृष्टि से देखते थे। इनके साथ गुलामों जैसा बर्ताव किया जाता था। फूलन के पिता की सारी जमीन उसके भाई से झगड़े में छिन गई थी। फूलन के पिता जो कुछ भी कमाते वह जमीन के झगड़े के चलते वकीलों की फीस में चला जाता।
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फूलन देवी
फूलन इसी तरह के दमघोंटू माहौल में पलते-पलते अंदर से बदले की आग से जलने लगी। उसकी इस जलन को सुलगाने में उसकी मां ने भी आग में घी का काम किया। जब फूलन 11 साल की हुई, तो उसके चचेरे भाई मायादिन ने उसको गांव से बाहर निकालने के लिए उसकी शादी पुत्तीलाल नाम के बुजुर्ग आदमी से करवा दी। उसमय फूलन की उम्र करीब 11 साल और पुत्तीलाल की उम्र 31 साल के करीब थी। ऐसी कहानियां बताई जाती हैं कि फूलन के पति पुत्तीलाल ने शादी के तुरंत बाद ही उसका रेप किया और उसे प्रताडित करने लगा। परेशान होकर फूलन पति का घर छोड़कर वापस मां-बाप के पास आकर रहने लगी।
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फूलन देवी
गांव में ही फूलन ने अपने परिवार के साथ मजदूरी करना शुरू कर दिया। यहीं से लोगों को फूलन के विद्रोही स्वभाव के नजारे देखने को मिले। एक बार तो जब एक आदमी ने फूलन को मकान बनाने में की गई मजदूरी का मेहनताना देने से मना कर दिया, तो उसने रात को उस आदमी के मकान को ही कचरे के ढेर में बदल दिया।
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फूलन देवी
उस समय फूलन 15 साल की थी जब कुछ दबंगों ने घर में ही उसके मां-बाप के सामने उसके साथ गैंगरेप किया। बावजूद फूलन के तेवर कमजोर नहीं पड़े। उसके बाद गांव के दबंगों ने एक दस्यु गैंग को कहकर फूलन का अपहरण करवा दिया। बस यहीं से शुरू हुआ फूलन के डकैत बनने की कहानी और उसने 14 फरवरी 1981 को बहमई में 20 ठाकुरों को लाइन में खड़ा करके मारी गोली मार दी। इस घटना ने फूलन देवी का नाम बच्चे की ज़ुबान पर ला दिया था। फूलन देवी का कहना था उन्होंने ये हत्याएं बदला लेने के लिए की थीं।
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फूलन देवी
कहा जाता था कि फूलन देवी का निशाना बड़ा अचूक था और उससे भी ज़्यादा कठोर था उनका दिल। उनके जीवन पर कई फ़िल्में भी बनीं लेकिन पुलिस का डर उन्हें हमेशा बना रहता था। साथ ही ख़ासकर ठाकुरों से उनकी दुश्मनी थी इसलिए उन्हें अपनी जान का ख़तरा हमेशा महसूस होता था। चंबल के बीहड़ों में पुलिस और ठाकुरों से बचते-बचते शायद वह थक गईं थीं इसलिए उन्होंने हथियार डालने का मन बना लिया।
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अपने दूसरे पति उम्मेद सिंह के साथ फूलन देवी की पुरानी तस्वीर
बिना मुकदमा चलाये ग्यारह साल तक जेल में रहने के बाद फूलन को 1994 में मुलायम सिंह यादव की सरकार ने रिहा कर दिया। ऐसा उस समय हुआ जब दलित लोग फूलन के समर्थन में गोलबंद हो रहे थे और फूलन इस समुदाय के प्रतीक के रूप में देखी जाती थी। फूलन ने अपनी रिहाई के बाद बौद्ध धर्म में अपना धर्मातंरण किया। 1996 में फूलन ने उत्तर प्रदेश के भदोही सीट से (लोकसभा) का चुनाव जीता और वह संसद पहुँचीं। 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में उनके आवास पर फूलन की हत्या कर दी गयी। उनके परिवार में सिर्फ़ उनके पति उम्मेद सिंह हैं जो इनदिनों दिल्ली में ही रह रहे हैं।
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फूलन देवी
1994 में मशहूर फिल्म निर्माता शेखर कपूर ने फूलन पर आधारित एक फिल्म बैंडिट क्वीन बनाई जो काफी चर्चित और विवादित रही। फूलन ने इस फिल्म पर बहुत सारी आपत्तियां दर्ज कराईं और भारतसरकार द्वारा भारत में इस फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गयी। इसके अलावा फूलन पर दर्जनों किताबें भारतीय और गैरभारतीय लेखकों द्वारा लिखी गई हैं।
दिल्ली की तिहाड़ जेल में कैद अपराधी शेर सिंह राणा ने फूलन की हत्या की थी। ऐसा कहा जाता है कि हत्या से पहले वह देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल से फर्जी तरीके से जमानत पर रिहा होने में कामयाब हो गया। फूलन की हत्या करने के बाद शेर सिंह फरार हो गया। कुछ समय बाद शेर सिंह ने एक वीडियो क्लिप जारी करके अंतिम हिन्दू सम्राट पृथ्वी राज चौहान की समाधी ढूंढकर उनकी अस्थियां भारत लेकर आने की कोशिश का दावा किया। हालांकि बाद में दिल्ली पुलिस ने उसे पकड़ लिया। फूलन की हत्या का राजनीतिक षडयंत्र भी माना जाता है। उसकी हत्या के छींटे उनके दूसरे पति उम्मेद सिंह पर भी आए। हालांकि उम्मेद सिंह आरोपित नहीं हुए।