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PHOTOS: बादलों में छुप गया चांद, जानें सामान्य दिनों से कितने प्रतिशत अधिक चमकीला और बड़ा होता है

Thu, 01 Feb 2018 04:44 PM IST
ओपी वाधवानी, अमर उजाला, कानपुर
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चंद्रग्रहण - फोटो : ओ पी वाधवानी
150 वर्ष पूर्व हुआ था ऐसा दुर्लभ चंद्रग्रहण





 
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चंद्रग्रहण - फोटो : ओ पी वाधवानी
शुरू में यह माना जाता था कि चंद्रग्रहण राहु-केतू के चंद्रमा को निगलने से होता है।
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चंद्रग्रहण - फोटो : ओ पी वाधवानी
धीरे-धीरे इसमें अंधविश्वास और मान्यताएं जुड़ती गईं, लेकिन विज्ञान ने सिद्ध कर दिया कि चंद्रग्रहण पृथ्वी की छाया के कारण होता है।

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चंद्रग्रहण - फोटो : ओ पी वाधवानी
जब चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश करता है तब उसका एक किनारा जिस पर छाया पड़ती है काली नजर आती है। इसे स्पर्श करते हैं।
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चंद्रग्रहण - फोटो : ओ पी वाधवानी
जब पूरा चंद्रमा छाया में आ जाता है तब पूर्ण ग्रहण आ जाता है।
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चंद्रग्रहण - फोटो : ओ पी वाधवानी
चंद्रमा के पृथ्वी की छाया से बाहर आते ही ग्रहण खत्म हो जाता है।
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चंद्रग्रहण - फोटो : ओ पी वाधवानी
चंद्र ग्रहण का कहीं कोई दुष्प्रभाव नहीं होता।

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चंद्रग्रहण - फोटो : ओ पी वाधवानी
इसे लेकर कुछ भ्रम और अंधविश्वास है। वैज्ञानिक इसका अध्ययन भी करते हैं।

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चंद्रग्रहण - फोटो : ओ पी वाधवानी
भारत के महान खगोलविद् आर्यभट्ट ने 1500 वर्ष पूर्व 499 ईस्वी में सिद्ध कर दिया था कि चंद्र ग्रहण सिर्फ खगोलीय घटना है।

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चंद्रग्रहण - फोटो : ओ पी वाधवानी
31 जनवरी का चंद्रग्रहण दुर्लभ खगोलीय घटना है।

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चंद्रग्रहण - फोटो : ओ पी वाधवानी
इसके पहले यह 150 वर्ष पूर्व 1866 में हुई थी।
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चंद्रग्रहण - फोटो : ओ पी वाधवानी
चंद्रग्रहण में चांद सामान्य से 14 प्रतिशत बड़ा और 30 प्रतिशत अधिक चमकीला दिखाई देता है।

 
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