कानपुर। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज अब एमडी, एमएस, डीएम और एमसीएच के साथ-साथ पीएचडी की डिग्री भी देगा। यहां पर छात्र न्यूरो सर्जरी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रो मेडिसिन, पेन मेडिसिन, मेडिसिन और सर्जरी में पीएचडी कर सकेंगे। यह प्रदेश का पहला राजकीय मेडिकल कॉलेज होगा जो पीएचडी कोर्स कराएगा। इस डिग्री को अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल विश्वविद्यालय लखनऊ से मान्यता प्राप्त होगी।
अभी तक किंग जॉर्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (केजीएमयू) और डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान लखनऊ मेडिकल के विषयों में पीएचडी की डिग्री देता है। वहीं किसी मेडिकल कॉलेज में पीएचडी नहीं कराई जा रही थी। जीएसवीएम पहला कॉलेज है जो अब पीएचडी कराएगा। कोर्स के लिए कॉलेज प्रबंधन ने प्रक्रिया शुरू कर दी है। कॉलेज और मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एंड पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट अलग-अलग विषयों में पीएचडी कराएंगे।
न्यूरो साइंसेस विभागाध्यक्ष और पीजीआई के नोडल अधिकारी डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एंड पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट में न्यूरो सर्जरी, न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रो मेडिसिन और पेन मेडिसिन में पीएचडी कराई जाएगी, जबकि मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन और सर्जरी विभाग में पीएचडी की व्यवस्था होगी। पीएचडी करने के लिए छात्र के पास एमडी, एमएस या समकक्ष डिग्री होना अनिवार्य है।
डॉ. सिंह ने कहा कि पीएचडी कोर्स के माध्यम से शोध कार्य को बढ़ावा मिलेगा और डाटा संकलन का कार्य भी बढ़ेगा। इससे इलाज की उच्च स्तरीय गाइडलाइन तैयार करने में आसानी रहेगी। रोगियों को इसका लाभ मिलेगा। इसके साथ ही डाटा की एनालिसिस भी की जाएगी। नए क्षेत्रों में भी शोध कार्य शुरू होंगे। अभी चिकित्सा शिक्षकों के पास रोगियों के इलाज के साथ पढ़ाने का भी कार्य होता है। पीएचडी स्कॉलर होने पर शोध के लिए अलग से विशिष्ट टीम तैयार हो जाएगी।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में 25 पैरा मेडिकल कोर्स भी संचालित किए जा रहे हैं। इनमें अधिकांश कोर्स दो साल अवधि के हैं। डीन ऑफ पैरा मेडिकल कोर्स डॉ. डॉली रस्तोगी ने बताया कि इनमें आर्थोपेडिक्स एंड प्लास्टर, ओटी, लैब टेक्नीशियन, कार्डियोलॉजी, सीटी, एमआरआई, एक्सरे टेक्नीशियन आदि कोर्स हैं।