यदि आपके शरीर का कोई अंग पहले से अधिक तेज चले, हिलने, कांपने या फड़कने लगा है। या फिर अचानक टेढ़ा या शिथिल होने लगता है तो आप भी ‘मूवमेंट डिसआर्डर’ बीमारी के शिकार हो रहे हैं। करीब 65 फीसदी लोग कई तरह की दवाओं के साइड इफेक्ट की वजह से इसकी चपेट में आते हैं। 35 फीसदी लोगों में इस बीमारी के कारणों का पता ही नहीं चलता।
कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंस विभाग के डॉक्टर पुनीत दीक्षित बताते हैं कि न्यूरोेलॉजी (स्नायुतंत्र) से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। मूवमेंट डिसआर्डर इसका एक हिस्सा मात्र है। मेडिकल कालेज में रोजाना हर ओपीडी में करीब 10 पेशेंट मूवमेंट डिसआर्डर से पीड़ित होते हैं। पार्किंसंस जैसी बीमारी आम मूवमेंट डिसआर्डर है। इससे भी खतरनाक लक्षण सामने आते हैं। इसका इलाज थोड़ा मुश्किल होता है।
डॉनपैरेडॉन व एलोपैरोडॉल बिना पूछे न लें
इसके बचाव का तरीका यही है कि बीमारी के लक्षण के साथ ही इसका उपचार शुरू हो जाए। दूसरा ये कि स्वयं अपना इलाज कभी न करें। कोई साधारण सी गोली जीवन भर के लिए मूवमेंट डिसआर्डर पैदा कर सकती है। उन्होंने बताया कि उल्टी की दवा डॉनपैरेडॉन व साइकोसिस की दवा एलोपैरोडॉल बिना डॉक्टर के एडवाइस कभी न लें। मूवमेंट डिसआर्डर का शिकार मरीज को इलाज के बाद भी जीवन पर्यंत इससे जूझना पड़ता है।
ये हैं लक्षण
बात करते हुए आंख या मुंह का टेढ़ा होना, काम करते हुए हाथ पैर या गर्दन का टेढ़ा होना, बिना वजह अंग हिलते रहना, किसी अंग का अचानक शिथिल हो जाना, तेजी खत्म हो जाना, स्वयं करवट न ले पाना, उठने बैठने, चलने में परेशानी होना।