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चिलहटा के लाल के अंतिम दर्शन को उमड़े लोग

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भीतरगांव (घाटमपुर)। सिलिगुड़ी जनपद की चीन सरहद की चोटी पर ट्रेनिंग के दौरान हादसे में जान गंवाने वाले नायब सूबेदार अमोल सिंह यादव का पार्थिव शरीर शुक्रवार शाम उनके पैतृक गांव चिलहटा लाया गया। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए पहले से ही हजारों की भीड़ जुटी थी। ताबूत में तिरंगे में लिपटे शहीद के पार्थिव शरीर से लिपट कर बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी व बच्चे बिलख पड़े। उनके पार्थिव शरीर को गांव के दक्षिणी छोर में स्थित पैतृक भूमि में ले जाकर पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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भीतरगांव विकास खंड के चिलहटा गांव निवासी रामसनेही यादव का छोटा बेटा अमोल सिंह यादव (48) सन् 1997 की लखनऊ के बूचड़ी ग्राउंड में रैली भर्ती के दौरान सेना में शामिल हुआ था। अहमदनगर में ट्रेनिंग के बाद विभिन्न राज्यों के पड़ोसी मुल्कों के बार्डर पर उनकी तैनाती रही। 13 मेक इन फिंट्री रेजीमेंट के नायब सूबेदार अमोल सिंह यादव पिछले साल भर से सिक्किम के चीनी सरहदी इलाके में तैनात थे।
साथ आए आर्मी जवानों के मुताबिक नायब सूबेदार अमोल सिंह यादव 16 सितंबर को यूनिट के साथ यांगड़ी चीनी बार्डर की चोटियों पर मौसम और बारिश के बीच तालमेल रखकर सरहद सुरक्षा की ट्रेनिंग ले रहे थे। तभी दोपहर बाद असंतुलित होकर गहरी खाई में जा गिरे। साथी जवानों ने आनन फानन रेस्क्यू कर आर्मी हास्पिटल में भर्ती कराया गया। जहां दोपहर बाद साढ़े तीन बजे उनकी सांसें थम गईं।
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शुक्रवार दोपहर बाद साढ़े चार बजे शहीद अमोल सिंह का पार्थिव शरीर कस्बा भीतरगांव से तिवारीपुर होते हुए उनके पैतृक गांव चिलहटा पहुंचा। जहां पर 30 मिनट तक परिवार के बीच रख बुजुर्ग मां मीरा देवी, पिता रामसनेही , पत्नी नीलम, दोनों बेटे विशाल और अनुराग, भाई बलवान सिंह भतीजे ज्ञानंद्र सहित पूरे गांव के अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। इसके बाद घर से तीन सौ मीटर दूर दक्षिण में पैतृक भूमि पर चिता सजाकर उनका पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके बड़े भाई बलवान सिंह ने मुखाग्नि दी।
चिलहटा गांव का ही जवान लेकर आया शहीद का पार्थिव शरीर
भीतरगांव। शुक्रवार को शहीद अमोल सिंह यादव का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव लेकर आए सेना के अफसरों और जवानों में एक जवान चिलहटा गांव ही था। साथ आए चिलहटा गांव का जवान हिम्मत सिंह यादव 12 मेक इन फ्रिंट्री रेजीमेंट के जवान हैं। जवान हिम्मत सिंह ने बताया कि उनकी तैनाती शहीद अमोल सिंह यादव की तैनाती से दो किमी आगे वाली चीनी सरहद की चोटी में है। बताया कि 16 सितम्बर की दोपहर साथी नायब सूबेदार अमोल के घायल होने की खबर मिलते ही उनकी यूनिट से संपर्क किया था।
शहीद को श्रद्धांजलि देने पहुंचे जनप्रतिनिधि और अधिकारी
भीतरगांव। शहीद अमोल सिंह यादव का पार्थिव शरीर पैतृक गांव चिलहटा आने के बाद अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने को रखा गया तो परिवार और गांव वालों के साथ ही तिवारीपुर, मलखानपुर, गुगुरा, हरीपुर, खुचकीपुर, उमरी, पासीखेड़ा, उदईपुर, पसेमा, भीतरगांव, वेरीखेड़ा तथा शाहपुर सहित दर्जनों गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों की भीड़ ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद सेना व पुलिस के जवान, फतेहपुर के पूर्व सांसद राकेश सचान, पूर्व सांसद राजाराम पाल, भाजपा नेत्री स्वप्निल वरुण, तहसीलदार नर्वल विनीत कुमार ने संयुक्त रुप से शहीद को पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी।
अमोल की फरवरी में चीनी सैनिकों से हुई थी गुत्थमगुत्था
भीतरगांव। शहीद अमोल सिंह का पार्थिव शरीर लेकर आए यूनिट के साथी जवान नायब सूबेदार रामप्रकाश ने बताया कि फरवरी माह में यांगड़ी चोटी के नीचे से कुछ चीनी जवान ऊपर भरतीय सरहद की ओर चढ़कर आने की कोशिश कर रहे थे। तभी हलचल मिलते ही नायक सूबेदार अमोल सिंह अपने छह साथियों के साथ जाकर ललकारा और चीनी सैनिकों से भिड़ गए। संख्या में चीनी सैनिक ज्यादा थे पर नायब सूबेदार अमोल सिंह की सैन्य टुकड़ी के साथ गुत्थमगुत्था होते ही चीनी सैनिक जान बचाकर भाग निकले थे। इसके बाद अमोल सिंह की सैन्य टुकड़ी में जोरदार पार्टी मनी थी। आंखों में गर्व के आंसू लिए राम प्रकाश ने बताया कि वह और अमोल सिंह एक ही साथ लखनऊ की भर्ती से सेना में दाखिल हुए थे।
चिता में लेटे बेटे को चूम फफक पड़े पिता
भीतरगांव। शहीद नायब सूबेदार अमोल सिंह यादव के पार्थिव शरीर को ताबूत में लिपटे तिरंगे के साथ उनके पैतृक गांव तक लाया गया था। सैन्य सम्मान और श्रद्धांजलि देने के बाद अंतिम संस्कार के समय सेना के अधिकारियों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को शहीद जवान के ताबूत से अलग कर बड़े भाई बलवान सिंह को सौंपा, इसी बीच बुजुर्ग पिता रामसनेही ने बेटे को फिर देखने की इच्छा जताई। सजाई जा रही चिता के पास जाकर बुजुर्ग पिता अपने बेटे के माथे को चूमा और फफक फफक कर रो पड़े। यह दृश्य सबकी आंखें नम हो गईं।
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