कानपुर देहात। वृद्धा पेंशन पाने के लिए जरूरतमंद जिले में भटक रहे हैं। तमाम ऐसे पात्र हैं। जिन्हें पेंशन पाने के लिए जिंदा होने का प्रमाण देना पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष में हुए सत्यापन में 2604 लाभार्थी अपात्र पाए जाने के बाद विभागीय कार्य प्रणाली पर भी उंगलियां उठ रही हैं। भले ही विभाग पारदर्शी व्यवस्था के तहत योजना का लाभ देने का दावा कर रहा हो, लेकिन एक साल के अंदर इतनी तादाद में पेंशन लाभार्थियों के अपात्र होना मुनासिब नहीं है।
समाज कल्याण विभाग की वृद्धा पेंशन योजना हजारों निराश्रित बुजुर्गों की जरूरतों का सहारा है। दवा, इलाज से लेकर छोटी-छेटी जरूरतों के लिए उन्हें दूसरों के सहारे की दरकार नहीं रहती। विभाग के आंकड़ों में 79111 लाभार्थी हैं। योजना के तहत उन्हें प्रतिमाह एक हजार रुपये दिए जाते हैं। विभाग हर तीन माह में एक साथ पेंशन की धनराशि लाभार्थियों के खाते में भेजता है। वित्तीय वर्ष में सत्यापन कराने के बाद तहसील, ब्लॉक से विभाग को रिपोर्ट भेजी गई थी। जिसमें 2588 लाभार्थी मृतक, 16 अपात्र पाए गए थे। नियमों के तहत पेंशन के लाभार्थी को हर छह माह पर बैंक में उपस्थित होकर अपने जीवित होने का प्रमाण देना होता है। लाभार्थी के तय अवधि में न आने पर बैंक मृत मानकर इसकी सूचना विभाग को देता है ताकि पेंशन रोकी जा सके। विभागीय सूत्र बताते हैं कि सत्यापन के दौरान चिह्नित किए गए मृतकों की बैंकों से कोई सूचना नहीं आई थी। ऐसे में साफ है कि पेंशन के नाम पर भले ही व्यवस्था पारदर्शी हो, मगर कहीं झोल हैं। विभाग में सख्ती के बाद भी तमाम बिचौलिए सक्रिय हैं। इधर अप्रैल माह में सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद विभाग अपात्र व मृतकों की पेंशन पर रोक लगाने की बात कह रहा है।
केस-1
साहब अभी मैं जिंदा हूं, सत्यापन के बाद बंद हो गई पेंशन
- रसूलाबाद ब्लाॅक के औररंगाबाद गहदेवा निवासी रामकली ने बताया कि वह जिंदा हैं। इसके बाद भी इसी साल हुए सत्यापन में उन्हें मृत दिखा दिया गया। उन्हें वर्ष 2022 तक पेंशन मिलती रही है। उसने अपने जीवित होने का प्रमाण पत्र देते हुए 20 नवंबर को जिला समाज कल्याण अधिकारी के नाम एक प्रार्थना पत्र दिया। जिसमें बुढ़ापे के सहारे के लिए पेंशन दिलाने की गुहार लगाई हैं।
केस-2
मैथा ब्लॉक के लुधौरा शिवली निवासी रामदेवी ने बताया कि उन्हें लगातार पेंशन मिलती चली आ रही है। इस वित्तीय वर्ष से उन्हें पेंशन की धनराशि नहीं मिली। जब विभाग में आकर जानकारी की गई तो पता चला उन्हें अपात्र दर्शा दिया गया है। साथ ही एक अन्य रिपोर्ट में उनके जीवित न होने की बात कही गई है। इसके लेकर उसने समाज कल्याण अधिकारी को पत्र देकर पेंशन दिलाने की गुहार लगाई है।
विभाग से हर साल सत्यापन होता है। वित्तीय वर्ष की सत्यापन रिपोर्ट के बाद अप्रैल माह से अपात्रों की पेंशन रोक दी गई थी। बैंकों को भी रिपोर्ट भेजी गई है। जो लोग अपनी समस्या लेकर आ रहे हैं, उनकी जांच व दोबारा सत्यापन के बाद योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया की जा रही है। जो भी नए आवेदन आ रहे हैं, उन्हें भी फीड कराया जा रहा है। अब आधार से खाते लिंक होने का बाद व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है।- डॉ. प्रज्ञा शंकर तिवारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी