राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के आगमन से ईश्वरीगंज गांव तो देश-दुनिया में पहचान पा गया लेकिन वहां फसलों के उजाड़ होने से किसान अब भी मुआवजे की आस में बैठे हैं। और तो और जिला प्रशासन खेत में बने तीन हेलीपैड को हटाने की अनुमति भी नहीं दे रहा है। किसानों को न तो मुआवजा दिया गया और न ही फसल बोने दी जा रही है। चार कर्मचारी रोजाना हेलीपैड की निगरानी करते हैं।
आश्वासन के बाद भी नहीं मिला मुआवजा
किसान
ईश्वरीगंज गांव में 15 सितंबर को ‘स्वच्छता ही सेवा’ राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ करने राष्ट्रपति आए थे। उनके कार्यक्रम से एक सप्ताह पहले से खेतों पर काम शुरू हो गया था। जमीन पर भिंडी, धनिया समेत अन्य फसलें लहलहा रही थीं। उन्हें हटाने के बाद तत्काल मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया था लेकिन कार्यक्रम खत्म होने के बाद से लेकर अभी तक हालात वैसे ही हैं।
न मुआवजा मिला, न ही खाली हो रहे हैं खेत
किसान की जमीन पर बना स्टेज
मैदान पर स्टेज बना हुआ है और तीनों हेलीपैड और सड़कें भी बिल्कुल वैसी ही बनीं हुई हैं। सरसों की बुआई का समय गुजरा जा रहा है लेकिन किसानों को खेत में जाने की अनुमति तक नहीं दी जा रही है। पीडब्लूडी के चार कर्मचारी रोजाना कार्यस्थल की निगरानी कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि मुआवजा न दे तो कम से कम जमीन पर खेती तो करने दें।