भीषण गर्मी से सामान्य लोगों की भी दिक्कत बढ़ रही
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उमस भरी गर्मी की रात में बार-बार बिजली गुल होने से लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है, इससे उनका जैविक चक्र बिगड़ रहा है। रात में रिसने वाले हारमोंस की प्रक्रिया बाधित हो रही है। मेनिया और डिप्रेशन के रोगियों की तबियत बिगड़ रही है। साथ ही, सामान्य लोगों की भी दिक्कत बढ़ रही है।
हैलट के मनोरोग विभाग में आजाद नगर की कल्याणी देवी (55) को लगातार रोना आ रहा है। साथ ही, उन्हें अंदेशा रहता है कि कुछ अशुभ होने वाला है और मरने का दिल करता है। डॉक्टरों ने उनकी डिप्रेशन की दवा शुरू की है। गर्मी और बिजली न आने के कारण नींद पूरी न होने से हर्षनगर के रहने वाले राजदेव राजा (47) कहते हैं कि वे बात करने में अधिक बोल जा रहे हैं।
उन्होंने शनिवार को पहले मेडिसिन की ओपीडी में दिखाया। इसके बाद उन्हें मनोरोग विभाग भेजा गया। मनोरोग विशेषज्ञ ने उन्हें मेनिया डायग्नोस बताया है। मनोरोग विभागाध्यक्ष डॉ. धनंजय चौधरी का कहना है कि नींद बाधित होने से जैविक चक्र बिगड़ने लगता है। इससे हारमोंस का सामंजस्य प्रभावित होता है। डोपामीन न्यूरो केमिकल की अधिकता होने से व्यक्ति मेनिया का शिकार हो जाता है और अधिक बोलने लगता है।
इसके अलावा नारएपीनेफरीन, सिरोटोनिन आदि न्यूरो केमिकल का सामंजस्य बिगड़ जाता है। रात के हारमोंस रिस नहीं पाते। इससे लोगों में चिड़चिड़ापन रहता है। उन्होंने बताया कि डिप्रेशन, एंजाइटी, मेनिया आदि रोगियों की दवा की डोज बदली गई है।