धरती का सीना चीरकर अन्न उगाने वाले किसानों को रिझाने के लिए पार्टियों ने घोषणाओं के पिटारे खोल दिए हैं। शहर को गांवों में ले जाने के दावे हो रहे हैं। किसान परिवार को खाद-पानी, शिक्षा और रोजगार दिलाने की बातें हो रही हैं। ऋण माफी के मुद्दे पर सभी दलों का जोर है। क्योंकि सभी दलों के लिए लखनऊ की राह बगैर किसानों के आसान नहीं है। जिले में तीन विधानसभा क्षेत्रों में लगभग ढाई लाख किसान हैं।
इनसे जुड़े परिवारी सदस्यों की अगर गणना करें तो आंकड़ा और बढ़ जाएगा। जाहिर सी बात है कि ये जिसकी पुकार सुनेंगे उसी की नैया पार होगी। लिहाजा सियासी समर में भाजपा, सपा, बसपा किसानों को लुभाने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। आलीशान बंगलों, लग्जरी कारों, एसी मे रहने वाले नेता आजकल खेतों की मेड़ों, खलिहानों, गांव के कच्चे चबूतरों पर पल्थी मारकर बैठकर किसानों की मनुहार कर रहे हैं।
धूल-मिट्टी से कपड़े गंदे होने की परवाह नहीं करते हैं। कीचड़युक्त, गड्ढेदार रास्ते पर पैदल चलकर खुद को जमीनी साबित करने में लगे हैं। गांव और खेतबाड़ी की बातें हो रही हैं। धुंआ भरे रास्तों को शहर की सड़कों जैसा चमाचम बनाने समेत मुंगीरेलाल के तमाम सपने दिखा रहे हैं, ताकि उनके वोटों के दम पर एमएलए बनने का सपना पूरा कर सकें।
राजनीतिक दलों के वादे
भाजपा
लघु और सीमांत किसानों का फसली ऋण माफ होगा।
किसानों को ब्याज मुक्त फसली ऋण दिलाया जाएगा।
गन्ना किसानों को फसल बेचने के 14 दिनों में भुगतान
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाएगी धान की खरीद
सभी गांवों को मिनी बस सेवा से शहर से जोड़ा जाएगा।
हर गांव में आधुनिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए जाएंगे।
सपा
सस्ते ब्याज दर पर किसानों को कर्ज दिया जाएगा।
किसान बीमा योजना की राशि होगी 7.5 लाख रुपये।
किसान क्रेडिट कार्ड पर दी जाएगी काश्तकारों को बुनियादी सुविधाएं।
ग्रामीण क्षेत्र में घरेलू उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली।
पशुओं के इलाज को 102, 108 एंबुलेंस की तरह विशेष सेवा।।
बसपा
गांवों में गरीबों को नकद आर्थिक सहायता दी जाएगी।
एक लाख रुपये तक का किसानों का कर्ज माफ होगा।
गांवों को भरपूर बिजली और सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।
गरीबों को पक्के मकान उपलब्ध कराएंगे।
आलू किसानों को उपज का वाजिब दाम दिलाने के प्रयास होंगे।