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'कर्ण' का कानपुर कनेक्शन: शहर की गलियों में बसी हैं पंकज धीर की यादें, चिड़ियाघर से रहा अनोखा रिश्ता

Wed, 15 Oct 2025 10:55 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Pankaj Dheer Died: पंकज धीर ने कक्षा सात से लेकर नौ तक क्राइस्ट चर्च इंटर कॉलेज में पढ़ाई की थी। आजादनगर में बेटे की शादी होने के बाद अक्सर शहर आना-जाना रहता था।
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कानपुर चिड़ियाघर में अपने परिवार के साथ एक्टर पंकज धीर (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अभिनेता पंकज धीर का शहर से बरसों पुराना नाता रहा है। उन्होंने कक्षा सात से नाै तक शहर में रहकर पढ़ाई की थी। उनका चिड़ियाघर से विशेष लगाव था। वह जब शहर आते थे तो चिड़ियाघर जरूर जाते थे। पंकज धीर और उनके बेटे निकितन प्राणी उद्यान के जानवरों के लिए बार दान भी करते थे जिससे उनके खाने-पीने की व्यवस्था हो सके।
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मूलरूप से लुधियाना निवासी पंकज स्वरूपनगर स्थित अपने चाचा के घर तीन साल रहे। उन्होंने कक्षा सात से लेकर नौ तक क्राइस्ट चर्च इंटर कॉलेज में पढ़ाई की। इसके बाद वह वापस लौट गए लेकिन शहर को नहीं भूले। अक्सर उनका शहर आना-जाना था। उन्होंने चेन्नई एक्सप्रेस में थंगबली का किरदार निभाने वाले बेटे निकितन की शादी भी शहर में ही की। आजादनगर निवासी अजय सेंगर की पुत्री व झांसी की रानी सीरियल में मुख्य किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस कृतिका सेंगर से निकितन की शादी के बाद उनका शहर से और गहरा रिश्ता हो गया था।

अजय सेंगर की बहन बीना सिंह ने बताया कि पंकज बेहद सरल स्वभाव के थे। पता ही नहीं चलता कि वह इतने बड़े कलाकार हैं। जब भी वह भैया या मेरे घर आते तो कभी किचन में मदद करने आ जाते, कभी खुद ही खाना परोसने लगते। बताया कि वह काफी समय से बीमार चल रहे थे। उनके पैंक्रियाज में कैंसर हो गया था। एक बार ठीक हुआ लेकिन फिर दोबार हो गया था। एक सप्ताह पहले भाई अजय उन्हें देखने गए थे। बताया कि पंकज जब शहर आने वाले होते तो फोन करके चिड़ियाघर के लिए बुकिंग पहले से कर देने की बात कहते थे।
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बनना था अर्जुन लेकिन मूछों से प्रेम के चलते बन गए कर्ण
पंकज धीर के करीबी रहे अशोक सिंह दद्दा ने बताया कि उनकी पत्नी अनीता धीर कॉस्ट्यूम डिजाइनर हैं। वह अपनी पौत्री देविका से बहुत प्यार करते थे। जब भी साथ में बैठते थे तो चर्चा करते थे कि कानपुर पहले वैसा था। अब बहुत बदलाव हो गया है। पंकज ने अपनी मूछों को लेकर बताया कि महाभारत में उन्हें पहले अर्जुन का रोल मिला था लेकिन इसके लिए उन्हें मूछें पड़ती। उन्हें मूछों से बहुत प्रेम था जिसकी वजह से उन्होंने मूछें हटवाने से मना कर दिया। कहा कि जो मूछों वाला रोल हो वह मुझे वह दें। इस पर उन्हें कर्ण का रोल दिया गया था जिसकी आज भी प्रशंसा होती है।
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