कानपुर। गाल ब्लैडर की छोटी पथरी के बड़ा होने का इंतजार न करें, तुरंत ऑपरेशन करा लें। छोटी पथरी से घातक रोग पैंक्रेटाइटिस अधिक होता है। यह पैंक्रियाज की नली में फंसता है। इससे सड़न पैदा हो जाती है और पैंक्रियाज गलने लगता है। यह बात प्रयागराज के एमएलएन मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. शबी अहमद ने बताई। उन्होंने कहा कि मोटापा और बिच्छू काटने से भी पैंक्रेटाइटिस होता है।
बिठूर में आयोजित एएसआईकॉन-2025 में डॉ. अहमद ने बताया कि गंगा के मैदानी इलाकों में दक्षिण भारत की तुलना में छह गुना गाल ब्लैडर की पथरी अधिक होती है। इस क्षेत्र में क्यों पथरी ज्यादा होती है, यह अभी भी यक्ष प्रश्न है। तमाम शोधों में अभी कारण पता नहीं लगा। इसके अलावा दुनिया में शराब पीने से अधिक पैंक्रेटाइटिस होता है लेकिन देश में गाल ब्लैडर की पथरी सबसे बड़ा कारण है। गाल ब्लैडर की पथरी वालों को सबसे बड़ा आयु वर्ग 30 से 40 वर्ष है लेकिन 50 से 60 वर्ष आयु वर्ग वाले रोगियों की मृत्यु दर अधिक है। उन्होंने बताया कि डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की दवाओं का भी पैंक्रियाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
एसोसिएशन सर्जंस ऑफ इंडिया की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नियोगी का कहना है कि किसी से भी गाल ब्लैडर की सर्जरी न कराएं। इससे बाइल डक्ट की चोट के मामले बढ़ गए हैं। इससे जटिलताएं बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञ गाल ब्लैडर स्टोन के हर केस को एडवांस केस की तरह ही देखें।