पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण गिरिजा देवी
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शास्त्रीय संगीत की धुन में डूबीं पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण गिरिजा देवी ने अपने हाथ जला लिए थे। सांस्कृतिक संगीत और खासकर ठुमरी की धरोहर गिरिजा देवी ने शास्त्रीय संगीत के श्रोताओं की घटती संख्या पर दुख जाहिर किया है।
उनका कहना है कि पाश्चात्य संगीत हावी हो रहा है लेकिन देश को दुनिया में पहचान दिलाने वाले शास्त्रीय और सांस्कृतिक संगीत को बढ़ावा देने के लिए बुजुर्गों और वरिष्ठ संगीत प्रेमियों को आगे आना होगा। गिरिजा देवी ने बचपन में रोटी बनाते वक्त संगीत की धुन में अपने हाथ जला लिए थे। उनका कहना है कि वही जुनून ही चाहिए, जो अब खत्म हो रहा है।
कानपुर में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि संगीत प्रेमी बहुत हैं लेकिन यह संगीत उन तक पहुंचाने वालों की संख्या में बढ़ोत्तरी की जरूरत है। इसके लिए इस कला के माहिर और बुजुर्ग संगीत प्रेमी कार्यशाला करें। ठुमरी और सांस्कृतिक गीत संगीत पेश करने वालों को उंगली पर गिना जा सकता है। ठुमरी गाना गठिन है लेकिन उनकी चाहत है कि यह विधा बढ़े, फले और फूले। गीत संगीत के घरानों की परंपरा खत्म हो रही है। पाश्चात्य सभ्यता के साथ उसके संगीत की वजह से देश के यह घराने खत्म हो रहे हैं। रानी लक्ष्मीबाई भी अपने लिए नहीं लड़ीं देश के लिए लड़ी थीं। सांस्कृतिक संगीत को बचाना सभी की जिम्मेदारी है।
कानपुर की आब-ओ-हवा में गूंजी ठुमरी की मिठास
ठुमरी गीत और संगीत में देश को दुनिया भर में पहचान दिलाने वाली पद्मश्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण गिरिजा देवी की आवाज ने कानपुर की आब-ओ-हवा में मिठास घोल दी। उनकी अद्भुत आवाज ने संगीत प्रेमियों को म्रंत्रमुग्ध कर दिया। बनारस घराने की विश्वविख्यात गायिका शुक्रवार को सिविल लाइंस के मर्चेंट चैंबर हॉल में लक्ष्मी देवी ललित कला अकादमी की ओर से हुए उनके सम्मान और गायन कार्यक्रम को पेश करने आई थीं।