भाजपा की इस बंपर जीत के पीछे जिस गणित ने काम किया उसमें संगठन रणनीति शामिल रही। जिसमें वार्ड, जिला और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं ने भरपूर साथ दिया।
पार्टी महानगरों की जिला इकाईयों ने उत्तर प्रदेश में वार्ड स्तर पर ऐसा चक्रव्यूह बनाया जिसे भेदने में विपक्षी पार्टियां सफल नहीं हो पाई। इसी तरह से क्षेत्रीय इकाई ने भी अपना जाल पूरे राज्य में बिछाया। जिसका नतीजा यह रहा कि कुछ मुस्लिम बाहुल्य सीटों को छोड़कर सभी में भाजपा का झंडा फहराया।
कानपुर में उत्तर जिला इकाई अध्यक्ष सुरेेंद्र मैथानी के हिस्से में चार विधानसभा सीटें थी, जिसमें उन्हें दो पर जीत हासिल हुई। इसी तरह दक्षिण जिला इकाई अध्यक्ष अनीता गुप्ता के हिस्सें में तीन विधानसभा सीटों को जिताने के जिम्मेदारी थी, जिसमें उन्हें दो पर विजय मिली।
इससे अलग कानपुर-बुंदेलखंड की 52 सीटों की जिम्मेदारी क्षेत्रीय इकाई पर थी। अध्यक्ष मानवेंद्र सिंह और क्षेत्रीय महामंत्री संगठन ओमप्रकाश ने अपनी टीम के साथ जो रणनीति बनाई, वह काफी सटीक साबित हुई। कुल 47 सीटों पर जीत मिली।
क्षेत्रीय इकाई की टीम में महामंत्री मुखलाल पाल, शैलेंद्र शुक्ल, मोहित पाण्डेय, आईटी टीम के दीपक राजानी, उत्तर इकाई से, मणिकांत जैन, जगदीश तिवारी, सत्येंद्र पाण्डेय, प्रमोद, मनोज मिश्र, डा. दिवाकर मिश्र, शिवांग मिश्रा, दीप अवस्थी, आलोक मिश्र, जावेद खान, अमित प्रताप सिंह, अशोक दद्दा । दक्षिण जिला इकाई से अध्यक्ष अनीता गुप्ता, अचल गुप्ता, भूपेंद्र त्रिपाठी, सरन पाण्डेय, अनूप तिवारी सहित सभी कार्यकर्ताओं की मुहिम रंग लाई।