उसे रक्त देने की जरूरत है ऐसे में इलाज के लिए उसके खाते में 13 हजार 700 रुपये जमा करा दें। भाई के इलाज के लिए उन्होंने बताये गए खाता नंबर पर दो किश्त में रुपये जमा कराये। इसके बाद बुधवार को जेल में जाकर भाई का हाल-चाल जानने का प्रयास किया तो पता चला कि वह बिलकुल स्वस्थ है। जेल से किसी ने भी फोन कर रुपये नहीं मांगे थे। इस मामले में पुलिस अधीक्षक वृंदा शुक्ला ने जेल के अधिकारियों से जानकारी मांगी है। सर्विलांस के जरिये फ्राड करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कराने का आश्वासन दिया है।
उधर, जेल अधीक्षक शशांक पांडेय ने बताया कि उनके जेल में सुनील नाम का कोई जेलर नहीं है। उनके यहां से कोई फोन नहीं किया गया है। यह आनलाइन ठगी करने वाले गिरोह का काम है। ऐसे किसी मामले के सामने आने पर बंदी के परिजन जेल आकर स्वयं बंदी व अधिकारियों से जानकारी ले सकते हैं। गौरतलब है कि जिले में इस तरह के पांच और मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस व जेल विभाग जांच करा रहा है।