कानपुर शहर में डेंगू के सामने एक और युवक जिंदगी की जंग लड़ते-लड़ते हार गया। चिकनगुनिया और डेंगू की चपेट में आए पूरे उत्तर भारत में यह सिलसिला लगातार जारी है। इधर स्वास्थ्य विभाग ने मौत से इनकार किया है। जाहिर है, स्वास्थ्य विभाग फजीहत से बचने के लिए डेंगू से मरने वालो की जानकारी बाहर नहीं आने देना चाहता।
जानकारी मिली है कि धनकुट्टी निवासी कमल गुप्ता (58) को एक हफ्ते से बुखार आ रहा था। परिजनों के अनुसार मोहल्ले में इलाज कराया गया, पर फायदा मिलने के बजाय दिक्कत बढ़ने लगी। उन्हें नौबस्ता के एक नर्सिंगहोम में भर्ती कराया गया। वहां चिकित्सकों ने उन्हें डेंगू होने की आशंका जताई। जांच कराने पर डेंगू की पुष्टि हुई। पर, इलाज के दौरान उनकी हालत सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ती गई। खून चढ़ने के बावजूद कमल के खून में प्लेटलेट्स की संख्या लगातार घटती गई। शुक्रवार को उनकी मौत हो गई।
चिकनगुनिया रोगी और बढ़ेे
हैलट, उर्सला सहित अन्य सरकारी और निजी चिकित्सालयों में पहुंचने वाले बुखार के रोगियों में से चिकनगुनिया जैसे लक्षणों वाले रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विशाल गुप्ता के अनुसार बुखार के 70 फीसदी से ज्यादा मरीज जोड़ों में दर्द की शिकायत कर रहे हैं। दूसरी तरफ जीएसवीएम मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में डेंगू के डेढ़ सौ से ज्यादा मरीजों की जांच की गई, पर स्वास्थ्य विभाग ने डेंगू के मरीजों की संख्या बताने से इनकार कर दिया।