फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

राजभर के हर शब्द में निशाने पर रही बीजेपी, बोले- 'उप का मतलब चुप', 'सरकार के गुलाम नहीं हैं'

Fri, 12 Oct 2018 07:29 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
ओम प्रकाश राजभर का स्वागत करते कार्यकर्ता - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
लोकसभा चुनाव नजदीक आते ही सरकार के खिलाफ विरोध के स्वर तीखे होते जा रहे है। विरोधियों के साथ-साथ अब अपनों ने भी भाजपा की नीतियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए है। यूपी के उरई-जालौन जिले में आए प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर जमकर हमला बोला।
विज्ञापन


उन्होने कहा कि भाजपा सिर्फ पिछड़ों के साथ दिखावा कर वोट बैंक की राजनीति कर रही है। गंगा सफाई के नाम पर लाखों करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे है, लेकिन पिछड़ों की शिक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं हो रहा है। रही बात राम मंदिर की तो जब-जब चुनाव नजदीक आता है तो भाजपा को राम मंदिर मुद्दा याद आने लगाता है। 

भागीदारी आंदोलन मंच के तत्वावधान में आयोजित महारैली में आए मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने जेल रोड स्थित सभागार में प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा सरकार पर तीखे प्रहार किए। भाजपा पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने सहित वादाखिलाफी के भी आरोप लगाए।
विज्ञापन


 
Trending Videos

लोकसभा चुनाव में भाजपा को ताकत का अहसास कराया जाएगा

राम मंदिर मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि भाजपा को चुनाव आते ही राम मंदिर मुद्दा नजर आने लगता है। चुनाव के पहले न तो उन्हें राम की याद रहती है और न ही मुद्दे का ध्यान। कहा कि वे सरकार के नहीं उनकी नीतियों के खिलाफ हैं।

उन्होंने भाजपा सहित अन्य दलों पर पिछड़ों की उपेक्षा करने का आरोप लगाकर कहा कि पार्टियां पिछड़ों को सिर्फ वोट बैंक समझती है। चुनाव के समय तो तमाम वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद जब हिस्सेदारी की बात आती है तो वह मुंह मोड़ लेते हैं।

उन्होंने उप मुख्यमंत्री केशव मौर्या पर भी तंज कसते हुए कहा कि हालात ये है कि उप का मतलब सिर्फ चुप भर ही रह गया है। कहा कि जब तक पिछली जातियों को उसका सम्मान वापस नहीं मिलता तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। आने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपनी ताकत का अहसास कराया जाएगा।
विज्ञापन

नैतिकता के आधार पर गुजरात सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए

योगी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने पिछड़ी जाति के 27 प्रतिशत आरक्षण को पिछड़ा, अति पिछड़ा व सर्वाधिक पिछड़ा में बांटने का वादा किया था, लेकिन अब तक कुछ भी नहीं हुआ। कहा कि वह सरकार के सहयोगी है गुलाम नहीं, इसलिए अपने हक की लड़ाई लड़ रहे है।

गुजरात में हुई हिंसा पर उन्होंने कहा कि नैतिकता के आधार पर गुजरात सरकार को इस्तीफा दे देना चाहिए। इस तरह की अराजकता से यह सिद्ध होता है कि सरकार हर मोर्चे पर विफल है। उन्होंने गुजरात सरकार पर कार्रवाई में देरी पर मोदी सरकार पर भी पक्षपात करने के आरोप लगाए। मंत्री ने यूपी में भी शराब बंदी व यूपी को विभाजित कर अन्य राज्यों का दर्जा दिए जाने की भी मांग उठाई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें