एक जून से 50 लाख से अधिक टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए ई-संचरण व्यवस्था से माल के परिवहन की व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई है लेकिन वाणिज्य कर कमिश्नर ने विशेष सहूलियत देते हुए 31 मई तक जारी फॉर्म-38 को वैध घोषित करते हुए इनके इस्तेमाल की अनुमति दी है, जिससे व्यापारियों ने राहत की सांस ली है।
करीब दो साल पहले ई-संचरण व्यवस्था को वैकल्पिक रूप से लागू किया गया था। शुरू में इसका भारी विरोध हुआ, मगर धीरे-धीरे जब व्यापारियों ने इस व्यवस्था के फायदे समझे तो सबकुछ सामान्य हो गया। इधर एक जून से 50 लाख से अधिक टर्नओवर वाले व्यापारियों के लिए ई-संचरण अनिवार्य कर दिया गया है।
कुछ व्यापारी संगठन इसके विरोध में हैं, उन्होंने कमिश्नर को इस संबंध में प्रत्यावेदन भी दिया मगर फिलहाल कोई संशोधन नहीं किया गया है। कमिश्नर मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि नई व्यवस्था व्यापारियों को विभागीय झंझटों से बचाने के लिए की गई है।
उन्होंने कहा कि यह सहूलियत दी गई है कि जो फॉर्म-38 बीती 31 मई तक जारी हो गए हैं, उनका उपयोग माल के परिवहन में किया जा सकता है। ये फॉर्म बेकार नहीं होंगे। फॉर्म समाप्त होने के बाद पूरी तरह ई-संचरण व्यवस्था से माल लाया जाएगा।
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