गोशालाओं में बंद मवेशियों की संख्या के आधार पर भूसे की खपत तय होती है। भूसे का भुगतान करने से पहले संबंधित खंड विकास अधिकारी और पशु चिकित्सा अधिकारी संयुक्त रूप से पशुओं की संख्या समेत अन्य बिंदुओं का सत्यापन करते हैं। इसके बाद ही भुगतान होता है।
एक करोड़ 62 लाख से अधिक भुगतान की पुष्टि
वर्ष 2020-21 में भूसा खरीद पर खर्च किए गए बजट का ऑडिट उपनिदेशक स्थानीय निधि लेखा परीक्षा विभाग ने किया था। इसकी गोपनीय रिपोर्ट जारी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जनपद में 40 गोशालाओं में भूसा खरीद के नाम पर 41 भुगतानों में अनियमितता पाई गई है। कुल एक करोड़ 62 लाख 36 हजार 672 रुपये के अनियमित भुगतान की पुष्टि हुई है। गोपनीय रिपोर्ट मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को भेजी गई है।
ऐसी-ऐसी अनियमितताएं
पिहानी ब्लाक की उमरसेड़ा ग्राम पंचायत मेंं भूसा खरीद के 17 लाख से अधिक रुपये के भुगतान के कोई अभिलेख ही नहीं मिले। जो अभिलेख स्थानीय निधि लेखा परीक्षा की टीम को दिखाए गए उससे भूसे की खरीद और खपत सत्यापित ही नहीं हुई।
निराश्रित पशुओं के लिए भूसा खरीदने में अगर जरा सी भी वित्तीय अनियमितता मिली है तो यह गंभीर मामला है। इसके लिए जो भी कर्मचारी और अधिकारी दोषी होंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामला संज्ञान में नहीं था, जांच कर कार्रवाई जरूर होगी। -एमपी सिंह, डीएम