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Kanpur News: अफसर बैठक में फंसे और लोग जाम में

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जाम में फंसे वाहन। - फोटो : संवाद
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कानपुर। झकरकटी बस अड्डा का निर्माण कार्य डेढ़ साल से अधिक समय से अटका पड़ा है। पहले ठेकेदार कंपनी और रोडवेज अधिकारी एक-दूसरे को पत्र भेजकर कार्य में तेजी लाने का दम भर रहे थे और अब बैठक-बैठक खेल रहे हैं। लोग रोज लगने वाले जाम से परेशान हैं।
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ठेकेदार कंपनी का दावा है कि सोमवार को बैठक होनी थी जिसमें कार्य को लेकर आ रही बाधाओं पर चर्चा की जानी थी। इससे पहले रविवार को अचानक बैठक स्थगित कर दी गई। परिवहन अधिकारियों का कहना है कि मुख्यालय से ही बैठक स्थगित की गई लेकिन कारण कोई नहीं बता सका।
झकरकटी बस अड्डे का पुर्नाविकास कार्य पीपीपी मॉडल के तहत 143 करोड़ से किया जाना है। इसके लिए पंजाब की सीगल कंपनी को चयनित किया गया था। योजना बने और टेंडर हुए करीब डेढ़ साल से ज्यादा समय हो गया लेकिन आज तक काम शुरू नहीं हो सका है। ठेकेदार कंपनी वर्क ऑर्डर लिए घूम रही और बस अड्डा खाली कर देने की बात कह रही है जिससे निर्माण कार्य हो सके लेकिन जिला प्रशासन और परिवहन निगम अधिकारियों के बीच प्रपत्रों का ही सिलसिला चल रहा है। अभी तक बस अड्डा शिफ्टिंग के लिए जगह ही चिह्नित नहीं हो सकी है। ठेकेदार कंपनी सीगल के आरपी सिंह ने बताया कि सोमवार को बैठक होनी थी लेकिन अब उसे परिवहन निगम की ओर से स्थगित कर दिया गया है। अब दो-तीन दिन में लखनऊ स्थित परिवहन निगम मुख्यालय जाकर अधिकारियों व सचिव से इस संबंध में बात करेंगे।
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पत्र भेजने का किया था दावा
इससे पूर्व ठेकेदार कंपनी का कहना था कि झकरकटी बस अड्डा खाली करने के लिए करीब 28 दिन पहले रोडवेज प्रबंधन को पत्र भेजा था लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं दिया गया। आज बस अड्डा शिफ्ट कर खाली जगह दे दें तो काम शुरू करा दें। परिवहन निगम के आरएम महेश कुमार का दावा था कि जिला प्रशासन को लिखकर दे दिया है कि कंपनी जब चाहे, सामान लेकर आ जाए और काम शुरू करें, हम बस अड्डा खाली कर देंगे। अभी तक कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।


बैठक का निर्णय मुख्यालय से ही होता है। इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि बैठक स्थगित क्यों और किन कारणों से हुई। मुख्यालय से जो आदेश होगा, उसी हिसाब से काम किया जाएगा। बस अड्डा शिफ्टिंग का निर्णय जिला प्रशासन को लेना है।
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-महेश कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम
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