कोरोना की जंग में डटे डॉक्टरों और उनके स्टाफ की सुरक्षा के लिए आयुध निर्माणी कानपुर ओएफसी ने एक खास मेडिकल मशीन ब्लड पेनिटेशन रेजिस्टेंस टेस्टिंग डिवाइस तैयार की है। इसकी मदद से डॉक्टरों द्वारा पहने जाने वाले व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण 'कोवराल' में इस्तेमाल में आने वाले कपड़े का परीक्षण किया जा सकेगा। आयुध निर्माणी बोर्ड के निर्देश पर 8 घंटे में इस डिवाइस को तैयार करके आयुध उपस्कर निर्माणी ओईएफ के अलावा आयुध निर्माणी शाहजहांपुर, हजरतपुर और मुरादनगर भेजा जा चुका है।
आयुध निर्माणी बोर्ड ने क्लोथिंग ग्रुप की निर्माणियों को डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ द्वारा पहनी जाने वाली एक खास ड्रेस कोवराल बनाने के निर्देश दिए हैं। लेकिन इस ड्रेस को तैयार करने में एक विशेष प्रकार के कपड़े की आवश्यकता होती है। इस कपड़े के परीक्षण के लिए देश में सिर्फ कोयंबटूर और डीआईडीई ग्वालियर में ही टेस्टिंग लैब हैं। जिससे ड्रेस बनाने में इस्तेमाल आने वाले कपड़े के परीक्षण के लिए काफी समय लगता है ।
निर्माणी के मीडिया प्रभारी विनय अवस्थी ने बताया कि ब्लड पेनिटेशन रेजिस्टेंस टेस्टिंग डिवाइस को निर्माणी में ही डिजाइन किया गया है। इसके प्रोटोटाइप बनाकर 31 मार्च को ओईएफ को दे दिया गया है। शहर में ओईएफ कोवरॉल बना रही है। इसके अलावा पांच अन्य डिवाइस अन्य निर्माणियों को भेज दिए गए हैं।
डिवाइस बनवाने में महाप्रबंधक एएन श्रीवास्तव, अपर महाप्रबंधक संदीप कन्हाई, कार्य प्रबंधक अमित सिंह, शशि पाल, कनिष्ठ कार्य प्रबंधक आरके वशिष्ठ की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह डिवाइस एएसटीएमएफ 1670-03 और आइएसओ 16603-2004 के मानकों के अनुरूप है। इसके अलावा एनएबीएल प्रत्यायन एकाडिशन प्रमाण पत्र के लिए भी आवेदन किया गया है। ताकि निर्माणी के गुणवत्ता नियंत्रण लैब में ही इसका परीक्षण किया जा सके।
इस तरह काम करेगी यह डिवाइस
कानपुर। कोवरॉल बनाते समय जो कपड़ा इस्तेमाल में लाया जाएगा। उसे इस डिवाइस के माध्यम से अलग-अलग दाब पर इसकी क्षमता का आकलन होगा। इस दौरान यह देखा जाएगा कि किसी भी प्रकार के खून के धब्बे या वायरस आदि डॉक्टर या पैरामेडिकल स्टाफ की स्किन तक पहुंचने से रोकने में यह सफल है या नहीं। ऐसा होने के बाद ही कोवरॉल तैयार करने वाले कपड़े का इस्तेमाल किया जा सकेगा।