विभिन्न जिलों के व्यंजनों का करना था सर्वे
इसके लिए छत्रपति शाहूजी महाराज विवि को नोडल बनाया गया था। सीएसजेएमयू और आईआईटी कानपुर को सर्वे विभिन्न जिलों के व्यंजनों का सर्वे करना था। सर्वे पूरा होने के बाद विभिन्न जिलों के व्यंजनों का इस योजना में चयन किया गया है। सीएसजेएमयू को छह जिलों कानपुर देहात, कन्नौज, इटावा, उन्नाव, फर्रुखाबाद, औरैया और आईआईटी कानपुर को कानपुर नगर की जिम्मेदारी दी गई थी।
शासन की ओर से तैयार की गई फाइनल लिस्ट
विवि के होटल मैनेजमेंट विभाग के सौरभ त्रिपाठी, सिद्धार्थ सिंह, अरविंद ने बताया कि सर्वे, छात्रों व शहर के लोगों से बात करने के अलावा शेल्फ लाइफ, न्यूट्रीशन वैल्यू, ट्रांसपोर्टेशन, पैकेजिंग के आधार पर व्यंजनों का चयन किया गया। उन्होंने बताया कि हम लोगों ने संभावित व्यंजनों के नाम दिए थे, जिसके बाद फाइनल लिस्ट शासन की ओर से तैयार की गई।
पारंपरिक स्वाद को मिलेगा बढ़ावा
इस योजना का उद्देश्य स्थानीय व्यंजनों को पहचान दिलाना और उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट करना है। समोसा, लड्डू और मक्खन मलाई जैसे व्यंजन लंबे समय से कानपुर की संस्कृति और खानपान का हिस्सा रहे हैं। खासतौर पर सर्दियों में मिलने वाली मक्खन मलाई शहर के स्वाद प्रेमियों की पहली पसंद मानी जाती है।
पर्यटन और कारोबार को मिलेगा फायदा
सरकारी मुहर लगने के बाद इन व्यंजनों को पर्यटन से भी जोड़ा जाएगा। बाहर से आने वाले पर्यटकों को अब कानपुर के इन खास स्वाद से रूबरू कराया जाएगा। इससे न केवल शहर की पहचान मजबूत होगी बल्कि स्थानीय हलवाई और छोटे कारोबारियों को भी आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
मंडल में कहां क्या प्रसिद्ध
- कानपुर नगर: समोसा, लड्डू, मलाई मक्खन।
- कानपुर देहात: खाद्य तेल, लस्सी।
- कन्नौज: गट्टा मिठाई, खोया पेड़ा।
- इटावा: सरसों की चटनी, सलाद, मट्ठा आलू, खीर मोहन।
- उन्नाव: काला जामुन, समोसा, कुशली, त्रिलोक परी।
- फर्रुखाबाद: दालमोठ, भुने आलू।
- औरैया: शुद्ध देसी घी, दूध की बर्फी, बालूशाही, गुड़।