कानपुर। मोटापा छोटे बच्चों के लिवर को खतरे में डाल रहा है। जर्नल ऑफ पीडियाट्रिक एंडोक्रोनोलॉजी एंड डायबिटीज में प्रकाशित एक शोध में यह स्थिति बताई गई है। यह शोध 10 से 18 साल के बीच उम्र के 62 बच्चों पर किया गया। जांच में सात बच्चों के लिवर में फाइब्रोसिस पाई गई। 40 बच्चों में फैटी लिवर के लक्षण मिले हैं। प्रत्येक 10 में से एक बच्चे में लिवर फाइब्रोसिस के संकेत मिले जो आगे चलकर सिरोसिस का रूप भी ले सकते हैं। इसके अलावा लिपिड प्रोफाइल की जांचों में कोलेस्ट्राल और ट्राईग्लीसिराइड बढ़ा हुआ मिला।
यह शोध रीजेंसी सेंटर फॉर डायबिटीज, एंडोक्रोनोलॉजी एंड रिसर्च की ओर से किया गया। सेंटर के सीनियर पीडियाट्रिक इंडोक्रोनोलॉजिस्ट और वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रश्मि कपूर ने गुरुवार को पीपीएन मार्केट स्थित सिटी क्लीनिक में पत्रकारों को बताया कि जंक फूड खाने, बाहर मैदान में खेलने न जाने से बच्चों के शरीर में वसा का जमाव बढ़ रहा है। इसका असर लिवर पर आता है। उन्होंने बताया कि बचपन का मोटापा बड़े होने पर भी बना रहता है। बच्चों के नाश्ते में बिस्कुट देने के बजाय फल, दूध आदि दें। टीवी या मोबाइल स्क्रीन एक घंटे से अधिक देर तक न देखने दें। विशेषज्ञों ने बताया कि मोटापे के कारण ही किशोरों में टाइप टू डायबिटीज बढ़ रही है।