अफसरों का कहना था कि कार्यभार लेने के दौरान सिस्टम से रिपोर्ट न लेकर मैनुअल ले ली गई। इसमें नकदी अपडेट नहीं थी। हालांकि सवाल यह उठता है कि सिस्टम अपडेट भी यही अफसर करते थे। सूत्रों ने बताया कि विभाग के उच्च अफसरों का दबाव पड़ने पर फिर से गिनती कराई गई।
तब पता चला कि करीब चार दिन रुपये न तो सिस्टम में थे और न ही मैनुअल। सवाल यह है कि चार दिन तक दस लाख की नकदी किसके पास थी। इस मामले में प्रवर अधीक्षक डाकघर मनोज कुमार श्रीवास्तव ने कुछ भी कहने से मना कर दिया। हालांकि दोनों पोस्टल असिस्टेंट को निलंबित कर दिया गया है। मामले की जांच डाकघर निरीक्षक दक्षिण अंकित द्विवेदी को सौंपी गई है।