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Kanpur News: अब अधिकारियों की मर्जी से जीरो नहीं होगा मस्टररोल

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कानपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत मस्टररोल को मनमाने ढंग से शून्य करने पर शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नई दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब बिना ठोस कारण और उच्चाधिकारियों की अनुमति के मस्टररोल शून्य नहीं किए जा सकेंगे।
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कानपुर नगर में 4832 मस्टररोल शून्य किए गए हैं। नई व्यवस्था में शून्य करने से पहले संबंधित अधिकारी को स्पष्टीकरण देना होगा। सक्षम अधिकारी की मंजूरी लेना भी अनिवार्य कर दिया गया है। प्रदेशभर में अब तक 5,79,898 मस्टररोल शून्य हो चुके हैं। यह बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की आशंका को दर्शाता है। सीतापुर में सर्वाधिक 27,152 और आजमगढ़ में 19,106 मस्टररोल शून्य किए गए।
मस्टररोल शून्य करने के पीछे गड़बड़ियां छिपाना और फर्जी हाजिरी से भुगतान निकालना मुख्य कारण थे। कानपुर में एक ही फोटो से कई दिनों तक मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाने का खेल पकड़ा गया था। इस पर पांच सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया। अब हाजिरी प्रक्रिया पूरी तरह अंकीय कर दी गई है। राष्ट्रीय मोबाइल निगरानी प्रणाली (एनएमएमएस) के जरिए भू-टैग फोटो, चेहरा प्रमाणीकरण और आइरिस पहचान जैसी तकनीकों से उपस्थिति दर्ज होगी, जिससे फर्जीवाड़े की गुंजाइश लगभग खत्म हो जाएगी।
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टाॅप 15 जिलों के आंकड़े
सीतापुर – 27,152
आजमगढ़ – 19,106

बहराइच – 18,371

खीरी – 17,310

प्रयागराज – 16,419

हरदोई – 14,731

जौनपुर – 14,008

गोरखपुर – 12,670

सुलतानपुर – 12,486

बाराबंकी – 11,697

रायबरेली – 10,149

अंबेडकरनगर – 9,416

अमेठी – 8,450

अयोध्या – 5,132

कानपुर नगर- 4832

वर्जन-
बिना अनुमति मस्टररोल शून्य करना अब आसान नहीं होगा और हर कार्रवाई की जवाबदेही तय होगी। इससे वास्तविक जरूरतमंद मजदूरों तक योजना का लाभ पहुंचाने का रास्ता भी साफ होगा। - चंद्रभान कनौजिया, उपायुक्त मनरेगा
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