कानपुर। सेंट्रल स्टेशन को आधुनिक बनाने में अभी छह माह और लगेंगे। मेट्रो की लेटलतीफी और समय-समय पर सेंट्रल पर सुंदरीकरण का कार्य बढ़ने के कारण ऐसा हुआ है। खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। पूरी तरह से जर्जर हो चुके स्टेशन मार्ग पर हर समय पानी भरा रहता है। स्टेशन तक आने और जाने में यात्रियों को काफी दिक्कतें रही हैं।
अमृत भारत योजना के तहत करीब 729 करोड़ की लागत से कानपुर सेंट्रल स्टेशन को विश्वस्तरीय व आधुनिक बनाया जा रहा है। फरवरी 2024 में सेंट्रल स्टेशन के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू हुआ था। अभी पहले चरण के कार्य के तहत स्टेशन की नई बिल्डिंग बनाई जा रही है। इसके निर्माण की समय सीमा अक्तूबर 2026 रखी गई थी। घंटाघर की तरफ मेट्रो का निर्माण कार्य चलने के कारण आए दिन बीच-बीच में रेलवे स्टेशन के जीर्णाेद्धार का काम रोक दिया जाता है। इस कारण अब कार्य के छह माह देर से मार्च 2027 तक पूरा होने की उम्मीद है।
कैंट व सिटी साइड को जोड़ते हुए एक कॉनकोड एरिया बनाया जाएगा। इसमें करीब दो हजार यात्री बैठकर ट्रेन का इंतजार कर सकेंगे। इससे प्लेटफार्म पर भीड़ घटेगी। कॉनकोड में मल्टीनेशनल कंपनी के लोग मीटिंग भी कर सकेंगे। आसपास दोनों तरफ आरक्षित व अनारक्षित टिकटघर भी बनेगा। फूड प्लाजा सहित अन्य जरूरी वस्तुओं के स्टॉल भी होंगे। कॉनकोड के दोनों ओर लिफ्ट व स्वचालित सीढि़यों की सुविधा भी होगी। भूमिगत पार्किंग उसके ऊपर थ्री स्टार होटल और शॉपिंग मॉल बनाने की भी योजना है।
अभी सेंट्रल स्टेशन के कुछ प्लेटफार्म की लंबाई कम होने से लंबी ट्रेनें आने पर यात्रियों को उतरने में दिक्कत होती है। जीर्णोद्धार के बाद सभी प्लेटफार्म पर 26 कोच की ट्रेन खड़ी हो सकेगी। इससे यात्री आराम से प्लेटफॉर्म पर ही उतर सकेंगे। प्लेटफॉर्म की संख्या भी 10 से बढ़ाकर 12 की जाएगी। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जीर्णोद्धार के दौरान काम बढ़ भी रहा है। कही जगह खाली दिखती है तो वहां यात्री सुविधाएं बढ़ाने के लिए कार्य कराने का आदेश आ जाता है। काम बढ़ने से समय सीमा भी बढ़ रही है।
वर्जन
मेट्रो की वजह से कार्य में देरी आई है लेकिन इसे समय सीमा में ही पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा।
-अमित सिंह, जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर-मध्य रेलवे