कानपुर। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण की ओर से गंगा किनारे बसाई गई ट्रांसगंगा सिटी में वर्ष 2016 के बाद दोबारा आवासीय प्लाटों की लॉटरी नहीं निकाली गई। अब प्राथमिकता के आधार पर बचे हुए प्लाट उन उद्यमियों को दिए जाएंगे जो वहां पर फैक्टरी लगाएंगे। यह बात बुधवार को सीईओ मयूर माहेश्वरी ने अमर उजाला कार्यालय में उपस्थित होकर संवाद कार्यक्रम में कही। इस दौरान औद्योगिक क्षेत्र से संबंधित उद्यमियों की समस्याओं को सुना और उनका निस्तारण किया।
मयूर माहेश्वरी ने कहा कि ट्रांसगंगा सिटी में उद्यमियों को प्राथमिकता देते हुए आवासीय भूखंडों का आवंटन किया जा रहा है। जल्द ही वहां फैक्टरियां संचालित होंगी। कैबिनेट के फैसले के बाद कताई मिलों की जमीनों को यूपीसीडा ने हस्तांतरित कर लिया है। जमीनों का आवंटन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर हो रहा है। जमीन का सर्वे पूरा होने के बाद ले आउट तैयार हो गया है। जमीन बिक्री का काम शुरू कर दिया है। ट्रांसगंगा सिटी को शहर से जोड़ने वाले पुल की पहली लागत 538 करोड़ तय की गई थी जिसे यूपीसीडा देने को राजी था। बाद में कई बार सर्वे के बाद ले-आउट बदला और ब्रिज कॉरपोरेशन ने लागत बढ़ाकर 800 करोड़ कर दी। एक संस्था का इतनी धनराशि दे पाना मुश्किल है। शासन को पत्र लिखकर लागत कम करने या फिर दूसरे संस्थानों से मदद करने की बात कही गई है। मंजूरी मिलते ही पुल का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- ऑनलाइन जमीन के आवेदन पर 21 दिन में आवंटन होता है।
- जमीन उद्योग चलाने के लिए मिलेगी, बिक्री के लिए नहीं।
- कोई समस्या हो तो आरएम से या फिर कार्यालय आकर संपर्क करें।
- यूपीसीडा के पास करीब 35 हजार हेक्टेयर का भूमि बैंक है।
- खाली भूखंडों पर भी फैक्टरी लगाने का काम तेजी से चल रहा है।