कृषि क्षेत्र की जमीन का आधार कार्ड तैयार करने के लिए हर कृषि क्षेत्र की जमीन का एक यूनिक आईडी नंबर होगा। 16 डिजिट के इस नंबर को राजस्व वाद कंप्यूटर प्रबंधन प्रणाली के साफ्टवेयर पर डालते ही संबंधित कृषि क्षेत्र की जमीन का पूरा ब्योरा आपके सामने होगा। प्रदेश सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने तेजी से अमल शुरू कर दिया है। तीन अप्रैल को सभी एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
नई व्यवस्था के तहत हर कृषि क्षेत्र की जमीन को 16 डिजिट का यूनिक नंबर देकर राजस्व वाद कंप्यूटर प्रबंधन प्रणाली के साफ्टवेयर पर डाला जाएगा। इन 16 डिजिट में एक से छह डिजिट तक गांव की जनगणना का कोड, सात से 10 तक का नंबर खेत का नंबर, 11 से 14 तक का नंबर जमीन की सब कैटेगरी (एक ही परिवार में किसके नाम की जमीन) और 15 से 16 तक का नंबर भूमि की श्रेणी (ऊसर, बंजर, उपजाऊ) का होगा। विवादित जमीन का नंबर अलग से दिया जाएगा। यह नंबर भी राजस्व वाद कंप्यूटर प्रबंधन प्रणाली के साफ्टवेयर पर डाला जाएगा।
ये होगा लाभ
एडीएम फाइनेंस संजय चौहान ने बताया कि कृषि क्षेत्र की जमीन को यूनिक आईडी नंबर मिलने पर जमीन की खतौनी ट्रेस करने में आसानी होगी। राजस्व वाद कंप्यूटर प्रबंधन प्रणाली की साइट पर आईडी नंबर डालते ही कृषि क्षेत्र की पूरी जानकारी आपके सामने होगी। कंप्यूटर प्रबंधन प्रणाली की साइट पर गेस्ट लॉगिन से कोई भी इस सुविधा का फायदा उठा सकेगा। कोई भी किसी की भी जमीन का ब्योरा देख सकेगा। नेशनल लैंड रिकार्ड मॉर्डनाइजेशन प्रोजेक्ट के तहत हर कृषि क्षेत्र की जमीन के नक्शे के डिजिटाइशेन की प्रक्रिया चल रही है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद कोई भी कहीं बैठकर अपनी जमीन का नक्शा देख सकेगा। जमीन के यूनिक आईडी नंबर देने के काम दो माह में पूरा होने की उम्मीद है।