कानपुर। भारतीय दलहन अनुसंधान परिषद (आईआईपीआर) कानपुर और अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्र (आईसीआरआईएसएटी) हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने अरहर की फसल को बर्बाद करने वाले स्टेरिलिटी मोजेक रोग का निवारण ढूंढ लिया है। वैज्ञानिकों ने इस रोग के प्रतिरोधी जीन की खोज कर ली है। इसका नाम सीसीएसएमडी 04 है। इसकी मदद से अरहर की फसलों को पूरी तरह इस रोग से बचाया जा सकेगा। यह सफलता अरहर की आशा प्रजाति पर हुए शोध में मिली। खोज न केवल नई रोग-प्रतिरोधी किस्मों के विकास को तेज करेगी, बल्कि भारत को दालों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी अहम योगदान देगी। भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. जीपी दीक्षित ने बताया कि स्टेरिलिटी मोजेक रोग से फसल को सर्वाधिक नुकसान बिहार, झारखंड और दक्षिण भारत में होता है। करीब चार साल के लंबे शोध के बाद यह कामयाबी मिली है। (ब्यूरो)