इटावा। जिले के 101 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में से 64 को विलय योजना से बाहर कर दिया गया है। ऐसे में अब जिले में विलय विद्यालयों की संख्या सिर्फ 37 रह गई है। बेसिक शिक्षा परिषद ने विलय के मानक बदले तो जिले के 64 विद्यालयों को राहत मिल गई है। विलय निरस्त होने पर इन विद्यालयों में पढ़ने वाले 444 बच्चों को अपने पुराने विद्यालय में भेजा जाएगा।
विलय के खिलाफ आंदोलन करने वाले शिक्षकों ने इसे अपनी जीत बताई है। कहा कि सभी विलय को निरस्त किया जाना चाहिए। प्रदेश सरकार ने 50 से कम बच्चों वाले प्राइमरी और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विलय का आदेश दिया था। इन विद्यालयों को दो किलोमीटर की परिधि वाले विद्यालयों विलय करना था।
इस मानक के अनुसार जिले में 101 स्कूल प्रभावित हुए थे। विलय के आदेश का छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, शिक्षकों से लेकर राजनैतिक दलों ने विरोध किया। उसके बाद शासन ने पुनर्विचार करते हुए यह दूरी घटाकर एक किलोमीटर कर दी है। इसका फायदा यह हुआ है कि पहले जो स्कूल एक से दो किलोमीटर के दायरे में थे, उन्हें अब फिर से अपनी पुरानी इमारतों में चलाने का रास्ता साफ हो गया है। इस फैसले के बाद कई गांवों में बच्चों के माता-पिता और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने संतोष जताया है। ग्रामीणों का कहना है कि हमारे बच्चे अब फिर से अपने गांव के स्कूल में पढ़ेंगे।
ब्लॉक विद्यालयों की संख्या
सैफई 11
बढ़पुरा 03
चकरनगर 05
महेवा 05
ताखा 01
बसरेहर 01
जसवंतनगर 03
भरथना 06
नगर क्षेत्र 02
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला उपाध्यक्ष उपेंद्र कुमार वर्मा का कहना है कि शुरुआत से ही संगठन विलय के विरोध में था। सरकार को चाहिए कि वह विद्यालयों में सुविधाओं में बढ़ोतरी करें। साथ ही शिक्षकों पर केवल पढ़ाई संबंधित ही काम कराया जाए। इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्राइवेट विद्यालयों की तुलना में बेहतर होगी।
शासन के निर्देशानुसार पहले 101 स्कूलों का समायोजन किया गया था। अब नई गाइडलाइन के मुताबिक 64 स्कूलों को इस दायरे से बाहर किया गया है। ये सभी स्कूल अब अपने मूल यानि पुराने भवनों में ही संचालित होंगे।
डॉ. राजेश कुमार, बीएसए