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Kanpur News: अब बीसीए करने के लिए 12वीं में गणित लेना जरूरी नहीं

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कानपुर। अब बीसीए करने के लिए 12वीं में गणित विषय लेने की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि ने छात्र हित में बड़ा फैसला करते हुए तय किया है कि अब से किसी भी संकाय के छात्र बीसीए की पढ़ाई कर सकेंगे। यह फैसला बुधवार को विवि में हुई एकेडमिक काउंसिल की बैठक में लिया गया। हालांकि दाखिले के बाद नॉन मैथ वाले छात्रों को ब्रिज कोर्स करना अनिवार्य होगा। इस निर्णय से हजारों छात्रों को लाभ मिलेगा। वहीं, उच्च गुणवत्ता वाले शोध को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष शोध अनुदान नीति शुरू करने की घोषणा की गई। इसके तहत 45 वर्ष से कम आयु के पात्र संकाय सदस्यों को दो लाख रुपये का अनुदान दिया जाएगा, जो उनके स्कोपस इंडेक्स्ड शोध कार्य के आधार पर होगा।
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बुधवार को कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में हुई बैठक में विवि में नई शिक्षा नीति के तहत संचालित चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को अनुमति मिल गई है। 30 विषयों के नए सिलेबस पर अंतिम मुहर लग गई है। बीबीए व बीसीए का नया पाठ्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इस सत्र से बीबीए कैपिटल मार्केट को शुरू करने की अनुमति मिल गई है। बैचलर ऑफ साइंस इन योगा का नाम अब बीएससी इन योगा साइंस, मास्टर ऑफ साइंस इन योगा का नाम अब एमएससी इन योगा साइंस होगा।
विवि कैंपस और संबद्ध महाविद्यालयों में तीन क्रेडिट का आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस कोर्स होगा। इसी तरह, 14 ऑनर्स कोर्स और एकल विषय स्नातक पाठ्यक्रम पर मुहर लग गई है। जैन पीठ, दीनदयाल शोध केंद्र, स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज, होटल मैनेजमेंट में शुरू हुए नए कोर्स की भी अनुमति मिल गई है। क्लीनिकल साइकोलॉजी में बीएससी और एमए कोर्स पर भी चर्चा के बाद सहमति दी गई। इस मौके पर विवि के प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, रजिस्ट्रार राकेश कुमार, कानपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (कूटा) के अध्यक्ष प्रो. बीडी पांडेय, प्रो. नीरज कुमार सिंह, प्रो. वृष्टि मित्रा, समेत सभी सदस्य उपस्थित रहे।
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विशेष शोध अनुदान नीति 5 सितंबर 2025 से लागू होगी। प्रो. पाठक ने कहा कि इस अनुदान के लिए आवेदन की आवश्यकता नहीं होगी। बशर्ते संकाय सदस्य ने पिछले शैक्षणिक वर्ष में कम से कम तीन शोध पत्र इंडेक्स्ड जर्नल में प्रकाशित किए हों। इसमें से कम से कम एक में प्रथम या पत्राचार लेखक हो। पात्रता के लिए संकाय सक्रिय शोध कार्य में संलग्न होना चाहिए और उस पर कोई अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं चल रही हो।
उन्होंने कहा कि क्लोन या फर्जी जर्नल में प्रकाशित शोध या नैतिक उल्लंघन के कारण वापस लिए गए शोध पत्र पर तीन वर्षों तक पात्रता समाप्त हो जाएगी। कुलपति की अध्यक्षता में गठित स्क्रीनिंग समिति विज्ञान, समाज विज्ञान, भारतीय भाषाओं तथा वाणिज्य एवं प्रबंधन के विभिन्न संकाय क्षेत्रों से चयन करेगी। अनुदान की राशि 12 माह के भीतर व्यय करना होगा।
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