उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (यूपी रेरा) ने प्रदेश में बनने वाले आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट के लिए ग्रेडिंग सिस्टम लागू कर दिया है। नियमों के मुताबिक और समय पर प्रोजेक्ट पूरे करने वाले बिल्डरों को इसका फायदा मिलेगा।
डेवलपर कंपनी की वित्तीय स्थिति, संगठन के ढांचे, प्रोजेक्ट पूरे करने की पिछली स्थिति, पूर्व में बनाए प्रोजेक्ट के लिए कंपलीशन सर्टिफिकेट, कब्जा देने, यूपी रेरा के प्रावधानों का पालन और ग्राहकों का फीडबैक बेहतर ग्रेड के लिए जरूरी होगा। प्रदेश में आए दिन नए-नए बिल्डरों के प्रोजेक्ट्स की घोषणाएं होती रहती हैं।
इनमें फ्लैट या अन्य प्रकार की संपत्ति खरीदने वालों को यह पता नहीं होता है कि बिल्डर की विश्वसनीयता कितनी है। उन्हें इस बात की जानकारी नहीं हो पाती कि बिल्डर की ओर से किए गए दावे वादे कितने सही हैं। हवाई वादों अदाओं के आधार पर शुरू किए गए बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट अटके हुए हैं।
प्रोजेक्ट में निवेश करने वाले ग्राहक कब्जा मिलने के इंतजार में वर्षों तक भटकते रहते हैं। इस स्थिति को रोकने के लिए यूपी रेरा ने डेवलपर्स को ग्रेडिंग देने का निर्णय लिया है। ग्रेड के लिहाज से प्रोजेक्ट के भावी खरीदार निवेश करने से पहले बिल्डर की विश्वसनीयता की जानकारी मिल सकेगी।