नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा के तहत गंगा नदी की सफाई का काम शुरू हो गया है। पहले वाराणसी, इलाहाबाद अब कानपुर में स्टीमर आ गया है। कश्मीर की डल झील में भी स्टीमर से सफाई हुई थी।
उसी तरह केंद्र सरकार ने गंगा में सफाई कार्य शुरू कराया है। स्टीमर का काम देखने नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा और नमामि गंगे से जुड़ी टीम सोमवार को कानपुर पहुंची। टीम का नेतृत्व नमामि गंगे समिति के राष्ट्रीय सचिव संजय चतुर्वेदी कर रहे हैं। उन्होंने परमट घाट जाकर जानकारी ली। स्टीमर चालक ने बताया कि जल स्तर कम होने से दिक्कत आ रही है।
इस तरह स्टीमर से होती है सफाई
योजना के तकनीकी विशेषज्ञ प्रवीन मुत्तीयर ने बताया कि स्टीमर के पीछे ट्रालीनुमा जाली लगी है। जो कचरे वाले स्थान पर पानी में नीचे चला जाता है, और फिर कचरे को भरकर ऊपर आ जाता है। इसी तरह कचरे को समेटते हुए नीचे बने बड़े से चैंबर में डालता जाता है। चैंबर की कुल क्षमता 60 टन की है।
जब चैंबर भर जाता है, तो उसमें आवाज के साथ लाइट जलने लगती है। चैंबर में जमा कचरे को एजेंसी के ट्रक में भरकर आउटर एरिया में फेंका जाता है। इस संबंध में नगर निगम के अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्रा ने बताया की कूड़ा फेंकने के लिए एजेंसी ने अभी परमिशन नहीं ली है, 16 फरवरी को प्रशासन के साथ बैठक में इस पर फैसला होगा।
सीसामऊ से सरसैया घाट तक सफाई
स्टीमर से गंगा की सफाई कई फेज में की जाएगी। पहले फेज में सीसामऊ नाले से सरसैया घाट तक सफाई की जानी है। एक दिन में सफाई चार घंटे तक की जाती है। इस समय सबसे ज्यादा कचरा सीसामऊ नाले के पास निकल रहा है। 50 मीटर की एरिया में ही कुछ ही देर में 60 टन से ज्यादा कचरा निकल आता है।