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अब आप भी पकड़ सकते हैं मिलावटखोरी, अपनाए ये तरीके

Mon, 06 Mar 2017 01:59 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार

-मिलावट का बाजार गरम, खुद करें जांच
-खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने जारी किया अलर्ट
-लोगों से जागरूक होने की अपील, खुद जांच के नुस्खे बताए
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डेमो पिक
होली नजदीक आते ही मिलावट का बाजार गरम हो गया है। जरा से फायदे के लिए खाद्य पदार्थों में मिलावट कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ किया जा रहा है। हाल ही में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने 12 सैंपल फेल होने पर एडीएम सिटी की कोर्ट में मुकदमे कराए हैं। विभाग ने मिलावट रोकने के लिए अलर्ट जारी कर मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान चला रखा है। अफसरों का कहना है कि हर शहरी को थोड़ा जागरूक होना होगा। अपने स्तर से भी कोई भी किसी भी खाद्य पदार्थ में मिलावट की जांच कर सकता है।
 
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डेमो पिक
ऐसे कर सकते हैं खुद जांच

खोवा
होली पर घर घर खोवा की डिमांड रहती है। इसलिए मिलावटखोर सबसे ज्यादा मिलावट खोवा में ही करते हैं। खोवा में मिलावट परखने का सबसे आसान घरेलू उपाय है। आप मेडिकर स्टोर से आयोडिन टिंचर खरीद लें। आयोडिन टिंचर की कुछ बूंद खोवा पर डालें। अगर खोवा काला या बैंगनी हो जाए तो उसमें स्टार्च (आलू, शकरकंद) की मिलावट है। 

 
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डेमो पिक
दूध
होली पर सबसे ज्यादा खपत खोवा की होती है। इसलिए दूध में जमकर मिलावट होती है। दूध में वनस्पति, यूरिया, डिटर्जेंट और फार्मलीन की मिलावट की जाती है। इससे पेट दर्द, अल्सर और लीवर की बीमारी होती है। आप घर में ही दूध में मिलावट की जांच कर सकते हैं। एक टेस्ट ट्यूब में दूध लेकर समान मात्रा में हाइड्रो क्लोरिक एसिड (एचसीएल) मिलाते हुए गर्म करें। लाल रंग आता है तो वनस्पति की मिलावट है। परखनली में दूध लेकर यूरियेज एन्जाइम डालकर अच्छी तरह हिलाएं और पांच बूंद पोटेशियम कार्बोनेट मिलाकर फिल्टर पट्टी पर कार्क से ढक दें। फिल्टर पेपर का रंग यदि पहले लाल और फिर हरा हो जाए तो यूरिया की मिलावट है। इसी तरह खोवा की जांच की जा सकती है।

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मिठाई
इसमें मेटानिल येलो की मिलावट की जाती है। इससे कैंसर होता है। मिठाई के नमूने को पानी के साथ गरम कर छान लें। इसके बाद एचसीएल की कुछ बूंदे मिलाएं। अगर रंग बदले तो समझ लें मिलावट है।

 
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चांदी का वर्क
आजकल चांदी की जगह एल्युमिनियम के वर्क का प्रयोग होता है। इससे पेट के रोग होते हैं। वर्क जलाएं अगर नीले तेज प्रकाश की लौ उठे तो समझ लें एल्युमिनियम का वर्क है।

 
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हल्दी
इसमें पीले रंग (एनिलिन रंजक) की मिलावट होती है। इससे कैंसर हो सकता है। हल्दी का नमूना परखनली में लेकर स्प्रिट की पांच-छह बूंद मिलाएं। स्प्रिट का रंग पीला हो जाए तो समझें मिलावट हैं।

 
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लाल मिर्च
इसमें ईंट का पाउडर या चूरा मिलाया जाता है। इससे पेट की समस्याएं होती हैं। लाल मिर्च में पानी मिलाकर हिलाएं अगर ईंट पाउडर होगा तो नीचे बैठ जाएगा।
 

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धनिया
मिट्टी और बुरादा मिलाया जाता है। एक परखनली में पानी के ऊपर चुटकी भर धनियां डालेंगे तो बुरादा पानी के ऊपर तैरने लगेगा।

 

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काली मिर्च
पपीते के बीज मिलाए जाते हैं। इससे लिवर की दिक्कत होती है। टेस्ट ट्यूब में पानी लेकर साबुत काली मिर्च का नमूना डालने पर काली मिर्च नीचे बैठ जाती है। पपीते के बीज होंगे तो तैरने लगेंगे।

 

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हींग
इसमें गालबेनम कोलोफ्रोनी मिलाया जाता है। इससे एलर्जी और दस्त होते हैं। चम्मच में रखकर जलाने पर कपूर जैसा जलता है तो मिलावट नहीं है।

 

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चीनी
चॉक पाउडर की मिलावट होती है। इससे लिवर में दिक्कत आती है। चीनी को पानी में घोलने पर चॉक पॉउडर नीचे बैठ जाता है। इससे मिलावट पता चलती है।

 
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चाय
प्रयोग में लाई जा चुकी चाय पर रंग का प्रयोग होता है। चमड़े केटुकड़े भी मिलाए जाते हैं। पेट और लिवर संबंधी रोग होते। भीगे सोख्ते पर चाय की पत्ती छिड़कने पर अगर कागज रंगीन हो जाए तो मिलावट है। कागज की गेंद बनाकर चुटकीभर चाय भरकर आग लगाएं। चमड़ा जलने की गंध है तो मिलावट है।

दाल
खेसारी दाल की मिलावट होती है। पेट दर्द, लिवर, कैंसर, अल्सर की बीमारी होती है। नमूने को पानी में आधे घंटे तक हिलाएं। अगर खेसारी दाल है तो पानी का रंग हरा हो जाएगा।

सरसो
आर्जीमोन बीज मिलाए जाते हैं। ड्राप्सी और हार्ट अटैक का खतरा होता है। लेंस से देखें। सरसो के दाने की सतह चिकनी होती है। आर्जीमोन के दाने खुरदरे और अधिक काले होते हैं।

मिलावट पर उम्र कैद तक की सजा
किसी भी खाद्य पदार्थ में मिलावट करने पर खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम 2006 में सजा का प्रावधान किया गया है। मिलावट अगर मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तो तीन साल से लेकर आजीवन कैद और पांच लाख रुपये तक जुर्माने की सजा है। अगर किसी खाद्य पदार्थ में ऐसी मिलावट है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है जैसे दूध में पानी तो पांच लाख रुपये तक जुर्माने की सजा है।

 
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