अब बसपा झेलेगी वंशवाद का दंश, यूं बांटे जा रहे है पद
Sun, 16 Apr 2017 11:09 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
सार
मंत्री, सांसद और विधायक ने अपनों को दिया राजनैतिक मंच
पूर्व राजयमंत्री ने पत्नी को तो विधायक ने बहू को बनवाया ब्लाक प्रमुख
पूर्व सांसद ब्रजलाल ने साले को दिलाया टिकट और उनकी पत्नी को बनवाया ब्लाक प्रमुख
सपा की तरह बसपा में भी परिवारवाद हावी रहा। बहुजन समाज पार्टी के मंत्री से लेकर सांसद और विधायक तक ने अपनों को न सिर्फ राजनैतिक मंच दिया, बल्कि उन्हें मंच का मास्टर बनाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।
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यह बात और है कि सभी मंत्री, सांसद और विधायक आज खुद पैदल नजर आ रहे हैं, कुछ ने बसपा से ही मुंह मोड़ लिया है और बाकी घरों के आगे पूर्व मंत्री और विधायक की नेम प्लेट लगाकर पार्टी का झंडा थामे खड़े नजर आ रहे हैं।
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इनमें सबसे पहला नाम आता है बसपा के कद्दावर नेता रहे पूर्व सांसद रहे ब्रजलाल खाबरी का। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में धाक जमाने वाले ब्रजलाल खाबरी को एक समय में बुंदेलखंड का मिनी सीएम तक कहा जाता था।
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ब्रजलाल ने 1999 में लोकसभा का चुनाव जीता था। इसके बाद 2007 में जब ब्रजलाल पूर्व सांसद और बसपा के मुख्य कोआर्डिनेटर थे, तब इन्होंने अपने साले श्रीपाल को उरई विधानसभा से बसपा से चुनाव लड़ाया था। हालांकि श्रीपाल कांग्रेस के प्रत्याशी विनोद चतुर्वेदी से चुनाव हार गए थे।
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पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी
इसके बाद भी ब्रजलाल ने हार नहीं मानी और 2011 में श्रीपाल की पत्नी विमला चौधरी को डकोर से ब्लाक प्रमुख भी बनवाया। बसपा से नाता तोड़ ब्रजलाल खाबरी ने इस बार विधानसभा का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर महरौनी सीट से लड़ा था, हालांकि वे हार गए।
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पूर्व विधायक छोटे सिंह चौहान।
इसी कड़ी में दूसरा नाम आता है बसपा के जगदीश प्रजापति का। वर्ष 2008 में कालपी स्थित कदौरा ब्लाक निवासी जगदीश को बसपा सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया था। जगदीश ने 2011 में अपनी पत्नी प्रेमा देवी को कदौरा ब्लाक का ब्लाक प्रमुख बनवाया।
2017 का विधानसभा चुनाव जगदीश प्रजापति ने बांदा की तिंदवारी सीट से लड़ा, लेकिन हार गए। तीसरा चर्चित नाम बसपा से 2007 में कालपी सीट से विधायक बने छोटे सिंह चौहान का है। छोटे सिंह ने विधायकी के दौरान ही वर्ष 2011 में महेवा ब्लाक (कालपी) से छोटे भाई सत्यपाल सिंह की पत्नी मंशा देवी को ब्लाक प्रमुख बनवाया था।