कोर्ट के आदेश के बावजूद गोंडा के सबरजिस्ट्रार कार्यालय में कार्यरत लिपिक के वेतन की कटौती न करने पर प्रमुख पारिवारिक न्यायाधीश ने गोंडा के एडीएम समेत चार अफसरों के खिलाफ अवमानना नोटिस जारी की है। मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी।
गोंडा के रानीपुरवा गांव निवासी विश्वनाथ प्रताप सिंह और कानपुर के जूही लाल कालोनी निवासी नीतू का विवाह 21 मई 1998 को हुआ था। उनके दो बच्चे हैं। विश्वनाथ सितंबर 2002 में नीतू और बच्चों को मायके छोड़ गया और दोबारा विदा कराने नहीं आया।
पारिवारिक न्यायालय ने 19 सितंबर 2003 से आदेश की तिथि 5 नवंबर 2009 तक नीतू को 1500 रुपये महीना तथा दोनों बच्चों को एक-एक हजार रुपये महीना अंतरिम गुजारा भत्ता के रूप में देने और आदेश की तिथि से नीतू को 2500 रुपये प्रतिमाह तथा दोनों बच्चों को 1500-1500 रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता के रूप में भुगतान करने का आदेश सुनाया। विश्वनाथ ने गुजारा भत्ते का भुगतान नहीं किया।
इस पर कोर्ट ने गोंडा के एडीएम वित्त एवं राजस्व को पत्र भेज गुजारा भत्ता की धनराशि 2,91,250 रुपये का भुगतान न होने तक विश्वनाथ का वेतन रोक देने का आदेश दिया। विश्वनाथ हाईकोर्ट गए जहां से उसे किस्तों में धनराशि भुगतान करने की राहत मिल गई।
इसके बाद भी विश्वनाथ ने धनराशि का भुगतान नहीं किया। एडीएम वित्त ने विश्वनाथ के वेतन से कटौती नहीं की। इस पर नीतू के अधिवक्ता शिवेंद्र पांडे ने 7 जनवरी 2019 को कोर्ट की अवमानना का वाद दाखिल कर दिया। मामले में कोर्ट ने गोंडा के एडीएम वित्त एवं राजस्व, सहायक महानिरीक्षक निबंधन, उपमहानिरीक्षक निबंधन व उपनिबंधक कर्नेलगंज को अवमानना नोटिस जारी की है।