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LalImli: बजट में नहीं मिला कुछ…लाल इमली का भविष्य समीक्षा बैठक पर टिका, वेतन समेत कई बिंदुओं पर होनी है चर्चा

Wed, 19 Mar 2025 12:24 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: मिल चलाने की घोषणा सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के दौरान जरूर की गई थी, लेकिन प्रदेश सरकार के बजट में भी इस संबंध में कोई धनराशि नहीं दी गई।
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लाल इमली मिल - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में लाल इमली मिल का भविष्य जल्द होनी वाली समीक्षा बैठक पर टिक गया है। बैठक में मिल के कर्मचारियों के वेतन समेत कई बिंदुओं पर चर्चा की जानी है। मिल को बजट में कुछ नहीं मिल सका है। माना जा रहा है कि इस वित्तीय वर्ष में मिल को बंद किया जा सकता है। इस वर्ष बंद न हुई तो उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव से पहले इसकी बंदी नहीं हो पाएगी। बीआईसी, लालइमली और धारीवाल मिल में अब 260 कर्मचारी ही बचे हैं।

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लाल इमली में कर्मचारियों-अफसरों की संख्या 175 ही रह गई है। पिछले साल 102 करोड़ के बजट से 34 महीने का बकाया भुगतान किया गया था। अभी भी कर्मचारियों के 36 महीने के वेतन, छह साल के बोनस, 2012 से लीव इन कैशमेंट का भुगतान बकाया है। बताया गया कि कपड़ा मंत्रालय ने आम बजट में कर्मचारियों को मार्च 2025 तक के भुगतान के लिए सरकार से वेतन मद में बजट का प्रस्ताव भेजा था लेकिन एक फरवरी को आए बजट में कुछ नहीं मिला।

सरकार के बजट में नहीं दी गई कोई धनराशि
बताया गया कि 31 मार्च को वित्तीय वर्ष खत्म होने वाला है। मंत्रालय की ओर से बजट का प्रावधान होने के बाद ही मिल की स्थिति साफ हो सकेगी। लाल इमली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अजय सिंह ने बताया कि इस संबंध में विभाग के अफसरों की जल्द ही समीक्षा बैठक प्रस्तावित है, जो सत्र समापन के बाद होगी। मिल चलाने की घोषणा सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के दौरान जरूर की गई थी, लेकिन प्रदेश सरकार के बजट में भी इस संबंध में कोई धनराशि नहीं दी गई।

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उच्च अधिकारियों के निर्देश के बाद भी नहीं दर्ज करा रहे रिपोर्ट
मिल में डेढ़ साल पहले 52 लाख रुपये का वेतन घोटाला सामने आया था। ऑडिटर और प्रारंभिक जांच में घोटाला साबित हो चुका है। चार अफसरों को चार्जशीट दी जा चुकी है। इसमें से तीन अफसर सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। एक आरोपी जल्द सेवानिवृत्त होने वाला है। इसके बाद भी आज तक एफआईआर नहीं दर्ज कराई गई है। अजय सिंह का कहना है कि लाखों रुपये का अफसरों ने मिलकर घोटाला किया है। ये भी पता चल चुका है कि आरोपी के रिश्तेदार के खाते में रकम गई थी। फिर भी कुछ नहीं हुआ।
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