राष्ट्रीय लोक अदालत में दो लाख दस हजार 746 मुकदमों का निस्तारण किए गए। 55 करोड़ 99 लाख 23 हजार 910 रुपये जुर्माना, प्रतिकर, उत्तराधिकार और दुर्घटना मुआवजा सुनाया गया। हालांकि लोक अदालत पर एक हजार और पांच सौ के नोट बंद होने का असर भी पड़ा। हालत यह रही कि कई बैंकों ने अपने स्टाल ही नहीं लगाए। लोक अदालत के उद्घाटन के दौरान हाईकोर्ट के प्रशासनिक जज जस्टिस एसएस चौहान ने कहा कि लोक अदालत में निस्तारित मुकदमों का जुर्माना, दुर्घटना क्लेम और अन्य धनराशि दस दिन में जमा कर सकते हैं।
उद्घाटन समारोह में जस्टिस ने कहा कि लोक अदालत में ज्यादा से ज्यादा मुकदमें निस्तारित किए जाएं। लोक अदालत में मुकदमे निस्तारित होने से न किसी की हार होती है और न किसी की जीत। इस दौरान जिला जज इफाकत अली खान, जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा, एसएसपी आकाश कुलहरि, एडीएम सिटी अविनाश सिंह समेत सभी न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
उधर, सैकेंड शनिवार की छुट्टी के कारण ज्यादातर लोगों ने पैसे बदलने और जमा करने को प्राथमिकता देते हुए बैकों में लाइन लगाई। बैंक कर्मचारियों की ड्यूटी लगी होने के कारण पीएनबी और ओवरसीज बैंक के काउंटर पर कोई नहीं दिखा। इन दोनों बैंकों के अफसरों को फोन किया जाता रहा लेकिन कोई नहीं पहुंच सका। मध्यस्थता केंद्र में भी सन्नाटा पसरा दिखा। लोक अदालत में न्यायिक अफसरों ने 16 हजार 905 और प्रशासनिक अफसरों ने एक लाख 93 हजार 661 मुकदमें निस्तारित किए। प्रीलिटिगेशन (मुकदमा पूर्व निस्तारण) के 178 और स्थायी लोक अदालत के दो मुकदमों का निस्तारण हुआ।