नोट और नमक ने सियासी चर्चाओं और यात्राओं पर पूरी तरह विराम लगा दिया है। तीन दिनों पहले तक अपनी-अपनी यात्राओं का राग अलाप रहे राजनीतिक दल अब नोट और नमक को लेकर समर्थन और विरोध की बयानबाजी में जुट गए हैं।
राजनीतिक दलों का जायका नमक ने बिगाड़ दिया है। उधर, आम लोगों का ध्यान भी सिर्फ नोट और नमक में अटक गया है। भाजपा की परिवर्तन यात्रा, कांग्रेस की राहुल संदेश यात्रा और सपा की विकास रथ यात्रा की चर्चाओं पर फिलहाल पूरी तरह ब्रेक लग गया है।
मंगलवार तक राजनीतिक परिदृश्य दूसरा था। गली-कूचों से लेकर चाय और चौपालों तक राजनीतिक दलों की रथ यात्राओं का बाजार गर्म था। इन दलों के नेताओं में आम लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने की होड़ लगी थी। लेकिन अचानक रातों-रात यह सब बदल गया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 500 और 1000 के नोटों पर प्रतिबंध की हलचल ने सारी सियासी चर्चाओं को दरकिनार कर दिया। हर जुंबा पर सिर्फ नोटों की चर्चा छा गई। इसी बीच तीसरे दिन नमक ने सियासी दलों का जायका और बिगाड़ दिया। रातों-रात जबर्दस्त फैली अफवाह ने भाजपा को सकते में ला दिया। विपक्षियों को मुद्दा मिल गया। फिलहाल नकम का चटखारा भले ही कम हो जाए, लेकिन नोटों का नजारा अभी बरकरार रहेगा।