श्रमिकों-कर्मचारियों के लिए अब ट्रेड यूनियन बनाना आसान नहीं होगा। केंद्र सरकार ट्रेड यूनियन गठन के लिए नियमों में कड़ाई करने जा रही है। इस संबंध में श्रम मंत्रालय ने प्रस्ताव तैयार किया है।
इसके तहत किसी भी फैक्ट्री-कारखाना में काम करने वाले कुल श्रमिकों का 10 फीसदी या फिर 100 श्रमिक ही ट्रेड यूनियन का गठन करने के लिए श्रम विभाग के ट्रेड यूनियन सेक्शन में आवेदन कर सकेंगे। वर्तमान में केवल 7 या इससे अधिक श्रमिक ट्रेड यूनियन का गठन कर सकते हैं।
केंद्र सरकार ने मजदूर यूनियन अधिनियम, औद्योगिक विवाद अधिनियम और औद्योगिक रोजगार स्थायी आदेश अधिनियम को मिलाकर एक नया अधिनियम का प्रस्ताव तैयार किया है।
प्रस्ताव के अनुसार केवल कारखाना-फैक्ट्री, कंपनी आदि में कार्यरत श्रमिक ही इस ट्रेड यूनियन में शामिल हो सकेंगे। बाहरी व्यक्ति ट्रेड यूनियन से नहीं जुड़ सकेगा। प्रस्ताव में कारखाना-फैक्ट्री परिसर आदि में धरना-प्रदर्शन आदि की छूट नहीं होगी।
विभाग से जुड़े अफसर ने बताया कि प्रस्ताव तैयार किया गया है। मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू किया जाएगा। अकेले कानपुर में ही 2-3 हजार ट्रेड़ यूनियनें हैं।
वहीं केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मंच के संयोजक असित कुमार सिंह का कहना है कि सरकार जो भी प्रस्ताव तैयार कर रही है वह श्रमिक-कर्मचारी विरोधी हैं। सिर्फ पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसे कानून तैयार किए जा रहे हैं। यदि ट्रेड यूनियनें नहीं होंगी तो श्रमिक-कर्मचारी की आवाज कौन उठाएगा।