कानपुर। बार-बार मांगने के बावजूद रिपोर्ट न देने और कोर्ट का नोटिस लेने से इन्कार करने पर सीजेएम सूरज मिश्रा ने सख्त रुख अपनाया है। सीजेएम ने मुख्य पोस्ट मास्टर व तीन डाककर्मियों के खिलाफ प्रकीर्ण वाद दर्ज कर गैर जमानती वारंट जारी किया है। सभी को गिरफ्तार कराकर 16 मार्च को कोर्ट में पेश करने के निर्देश पुलिस कमिश्रर को दिए हैं।
परमट निवासी गायत्री तिवारी ने बेटी का एक लाख रुपया हड़पने का आरोप लगाते हुए ग्वालटोली डाकखाने के लिपिक अजय, बड़ा चौराहा स्थित प्रधान डाकघर के बाबू महेश व आनंद और सूटरगंज निवासी नरेंद्र कुमार तिवारी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। कहा गया था कि गायत्री ने ग्वालटोली डाकखाने से अपनी बेटी तरुषी तिवारी के नाम पर किसान विकास पत्र खरीदे थे जो उनके पति ने चोरी कर लिए। गायत्री ने डाकघर के बाबू अजय को बताया तो उसने कागजी कार्रवाई पूरी करने की बात कही। कागजात पूरे करके गायत्री ने अजय को दे दिए लेकिन उसे रुपये नहीं मिले। तीन फरवरी को जब वह डाकघर गई तो अजय ने बदतमीजी करते हुए भुगतान देने से मना कर दिया।
अगले दिन गायत्री बड़ा चौराहा स्थित प्रधान डाकघर पहुंची और लिपिक महेश व आनंद वर्मा को अपनी बात बताई तो इन लोगों ने भी भुगतान न करने की बात कहते हुए धमकी दी। कोर्ट ने डाककर्मी अजय, महेश व आनंद को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा था लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इस पर कोर्ट ने मुख्य पोस्ट मास्टर को नोटिस जारी कर छह मार्च तक जवाब देने को कहा था। मुख्य पोस्ट मास्टर ने भी कोई जवाब नहीं दिया। कोर्ट में आई कोतवाली पुलिस की रिपोर्ट में बताया गया कि डाककर्मियों ने नोटिस लेने से इन्कार कर दिया था। इस पर कोर्ट ने तीनों डाककर्मियों के अलावा मुख्य पोस्ट मास्टर के खिलाफ भी प्रकीर्ण वाद दर्ज करने के आदेश दे दिए। चारों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया है।
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कांग्रेसी नेता से रंगदारी मामले में तीन को मिली अग्रिम जमानत
- नामजद सभी 10 आरोपियों को मिल चुकी जमानत
संवाद न्यूज एजेंसी
कानपुर। रंगदारी के मामले में आरोपी हरजेंदर नगर निवासी मो. आमिर उसके भाई मो. शोएब और गल्ला गोदाम जाजमऊ निवासी शोएब के बेटे फराज की अग्रिम जमानत अर्जी अपर जिला जज प्रथम सपना त्रिपाठी ने मंजूर कर ली है। मामले में नामजद सभी 10 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। अखिलेश, अमिता, रामेंद्र और पप्पू स्मार्ट के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है।
कोतवाली में कांग्रेस नेता व अधिवक्ता संदीप शुक्ला ने अखिलेश दुबे व पप्पू स्मार्ट समेत 10 नामजद लोगों के खिलाफ राजा ययाति के किले और लोक निर्माण विभाग की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने का आरोप लगाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि रंजिश मानकर गिरोह के सदस्य पप्पू स्मार्ट, आमिर, बिच्छू, शोएब उर्फ पप्पी, मो.जैन कालिया, फराज, रामेंद्र उर्फ गुड्डू व हर्षित यादव ने अखिलेश दुबे के साथ मिलकर उन्हें पॉक्सो एक्ट के दो झूठे मुकदमों में फंसा दिया। मुकदमा खत्म कराने के नाम पर 10 लाख रुपये रंगदारी मांगी।
मामले में आरोपी मो.आमिर, मो.शोएब और फराज की ओर से अग्रिम जमानत अर्जी दाखिल की गई थी। अधिवक्ता सरला गुप्ता व कैलाश सैनी ने तर्क रखा कि एक मई 2019 की घटना की रिपोर्ट नौ अगस्त 2025 को दर्ज कराई। मामले में कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। अपराध में सात साल से कम सजा का प्रावधान है। कोर्ट ने पाया कि मुख्य अभियुक्त अखिलेश दुबे को जमानत मिल चुकी है। सहअभियुक्त पप्पू स्मार्ट, अमिता यादव, जैन कालिया व रामेंद्र गुप्ता को भी जमानत मिल गई है। इसके अलावा हर्षित यादव, मीनेश यादव को भी अग्रिम जमानत दी जा चुकी है। इन्हीं आधारों पर आमिर, शोएब व फराज को भी अग्रिम जमानत दे दी।