झींझक। दिल्ली-हावड़ा रेल लाइन पर झींझक में करीब 28 करोड़ आठ लाख रुपये की लागत से बने रेलवे ओवरब्रिज पर पैदल राहगीरों के लिए सीढ़ियां नहीं होने से लोगों की जान जोखिम में है। कम दूरी तय करने के लिए लोग रेलवे की बाउंड्री फांदकर पटरियां पार करने को मजबूर हैं। ऐसे में लोग हादसे का शिकार हो रहे हैं। इस पर लोगों में नाराजगी है।
सिकंदरा-रसूलाबाद मार्ग पर झींझक रेलवे लाइन के ऊपर बने ओवरब्रिज का उद्घाटन 26 फरवरी 2024 को हुआ था। पुल चालू होने के बाद रेलवे फाटक बंद कर दिया गया। करीब 800 मीटर लंबे पुल पर वाहनों के आवागमन की सुविधा तो शुरू कर दी गई लेकिन पैदल यात्रियों के लिए दोनों ओर सीढ़ियां नहीं बनाई गईं। सीढ़ियां न होने से राहगीरों को पुल के रास्ते आने-जाने में करीब एक किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
ऐसे में कई लोग समय और दूरी बचाने के चक्कर में रेलवे की बाउंड्री फांदकर पटरियां पार करते हैं। इससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। सीढ़ियां नहीं होने से बुजुर्गों, महिलाओं, बच्चों और मरीजों को सबसे अधिक परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे फाटक बंद किए जाने के बाद पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्ते की व्यवस्था जरूरी थी। सीढ़ियां नहीं होने से समस्या और गंभीर हो गई है।
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जल्द बनवाई जाएं सीढ़ियां
ओवरब्रिज पर पैदल यात्रियों के लिए सीढ़ियां नहीं होने से आमजन को परेशानी हो रही है। रेलवे पटरियां पार करते समय हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। प्रशासन को दोनों ओर जल्द सीढ़ियों का निर्माण कराना चाहिए, ताकि लोगों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके। - अभिषेक मिश्रा, झींझक
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ओवरब्रिज बने दो साल से अधिक समय हो चुका है लेकिन पैदल यात्रियों के लिए अब तक सीढ़ियां नहीं बन सकी हैं। मजबूरी में लोगों को पटरियां पार करनी पड़ती हैं। बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और मरीज सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। कम दूरी के लिए भी करीब एक किलोमीटर अतिरिक्त घूमकर जाना पड़ता है। सीढ़ियों का निर्माण जल्द कराया जाना चाहिए। - हृदेश गुप्ता झींझक
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बयान....
ओवरब्रिज पर सीढ़ियां बनवाने के लिए अधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य कराया जाएगा। - धर्मेंद्र कुमार, स्टेशन अधीक्षक झींझक