कानपुर। पारा 42 डिग्री के पार है। इंसान पांच मिनट धूप में खड़ा नहीं हो पा रहा, लेकिन गोशालाओं में वही धूप गोवंशों के लिए मौत बन गई है। जिम्मेदारों ने बीमार गोवंशों को चिलचिलाती धूप में भूख और प्यास से मरने के लिए छोड़ दिया। खुले आसमान के नीचे नाद में भरा गर्म पानी गोवंश पीने के मजबूर हैं। गोशालाओं में पर्दा तो छोड़िए पर्याप्त टीन शेड तक नहीं हैं जिसकारण सही से छाया तक नहीं है। जिसकी वजह से चिलचिलाती धूप में खडे होने को मजूबर हो रहे हैं। सरकारी दावे और जमीनी हकीकत के बीच खाई इतनी गहरी है कि गो संरक्षण अब कागजों तक सिमटता नजर आ रहा है। अमर उजाला की टीम ने अलग-अलग ब्लाॅकों में बनीं गोशालाओं की पड़ताल की तो जो तस्वीरें सामने आईं, वो सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता का खुला सबूत हैं। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश का भी जिम्मेदारों ने पालन करना नहीं समझा।
बिरहर गोशाला: धूप में तड़पकर तीन गोवंशों ने तोड़ा दम
शनिवार दोपहर… सूरज सिर पर आग बरसा रहा था। भीतरगांव ब्लाक की बिरहर वृहद गोशाला में कदम रखते ही कराहने की आवाजें सुनाई दीं। एक गोवंश जमीन पर चिलचिलाती धूप में गिरा हांफ रहा था, मुंह से सफेद फेना निकाल रहा था। पास ही दूसरा बीमार गोवंश बार-बार उठने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पूरी तरह कमजोर और असहाय होने के कारण उठ नहीं पा रही था और गिर जा रहा था। यहीं नहीं दो गोवंश टीन शेड के नीचे बीमार पड़े थे जिनका इलाज करने वाला और पानी पिलाने वाला कोई नहीं था। जानकारी पर पता चला कि दो दिन में धूप में तीन गोवंशों ने दम तोड़ चुकी हैं। इस गोशला में 429 गोवंश संरक्षित हैं। वाली इस गोशाला में टीन शेड होने के बावजूद बीमार पशु खुले में पड़े मिले। आठ केयरटेकर तैनात हैं, लेकिन मौके पर कोई जिम्मेदारी निभाता नजर नहीं आया।
गर्म पानी पीकर गोवंश हो रहे बीमार
चौबेपुर ब्लाक की तात्यागंज स्थित गोशाला में गोवंशों के पानी पीने के लिए खुले आसमान के नीचे हौद में पानी भरा जाता है। दोपहर में इस हौद का पानी छूते ही हाथ झुलसने जैसा अहसास हुआ। यही पानी गोवंश पीने को मजबूर हैं। त्रिलोकपुर ग्राम पंचायत स्थित गोशाला के हालात और बदतर हैं। यहां पर न पेड़, न पर्याप्त टीन शेड। दर्जनों गोवंश तेज धूप में खड़े-खड़े हांफ रहे थे। यही नहीं इस भीषण गर्मी में जिम्मेदार अभी भी खाने में भूसा न देकर उन्हें पुआल खिला रहे हैं। जो बीमार हो गया उसे ठीक होना मुश्किल हो गया है। पशु चिकित्सक कहते हैं कि इस मौसम में ठंडा पानी और छाया जरूरी है, लेकिन यहां बुनियादी इंतजाम तक नहीं। जिम्मेदारों ने गोवंशों को गर्मी में मरने के लिए छोड़ दिया है।
परास गोशाला: भूख और गर्मी की दोहरी मार
घाटमपुर ब्लाक की परास गोशाला में 165 गोवंश संरक्षित हैं। हरा चारा तो नसीब नहीं है, सिर्फ सूखा भूसा दिया जा रहा है। नाद में भरा पानी धूप के कारण खुले में उबल रहा था। यही गर्म पानी पीकर गोवंश अपनी प्यास बुझा रहे हैं। दो बीमार गोवंश टीन शेड के नीचे गर्मी में बेहाल पड़े अंतिम सांसे गिन रहे थे। हालांकि यहां पर टिनशेड के नीचे गर्म हवा से बचने के लिए पर्दे लगाए गए हैं।
बरनाव गोशाला: ताला बंद, सिस्टम गायब
पतारा ब्लॉक की बरनाव गोशाला में दोपहर में गेट पर ताला लटका मिला। अंदर झांककर देखा तो गोवंश गंदगी और गोबर के बीच बैठे थे।
पानी का हौज धूप में तप रहा था और बीमार पशु धूप में बैठे हाफ रहे थे। वहीं पर्याप्त टीन शेड की व्यवस्था न होने के कारण कई गोवंश छाया की तालाश में भटकते मिले। यहां पर 382 गोवंश संरक्षित हैं इसमें पांच बीमार मिले लेकिन उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं मिला।
हरा चारा नहीं, सूखा भूसा खाने को मजबूर
सरसौल ब्लाक की रामपुर और सुनहैला गोशाला के काफी हद तक व्यवस्थाएं सही मिलीं। हरा चारा तो नहीं था लेकिन नाद में सूखा भूसा पड़ा था। यहां पर करीब 243 गोवंश संरक्षित हैं। एक बीमार पड़ा मिला जिसका इलाज चल रहा था। पर्याप्त मात्रा में पेड़ होने के कारण गोवंश छाव में बैठे मिले। पानी की नाद खुली में थी लेकिन पानी चलता मिला जिसकारण पानी गर्म नहीं था।
टिनशेड की व्यवस्था नहीं,धूप में खडे मिले गोवंश
बिधनू की कठारा गोशाला में 270 गोवंश संरक्षित हैं। गोवंशों के सापेक्ष टीन शेड की व्यवस्था न हो पाने के कारण गोवंश धूप में खड़े मिले। हरा चारा गायब था सिर्फ सूखा भूसा नाद में पड़ा मिला। गोवंशों के लिए लगाया गया स्प्रिंकलर खराब पड़ा मिला। खुले आसमान के नीचे बना पानी के हौज में गोवंश पानी पीने को मजबूर थे। दो गोवंश बीमार मिले जिनका इलाज चल रहा है।
टीन शेड टूटा, पानी की व्यवस्था ही नहीं
बिल्हौर ब्लाक के उधौ निवादा स्थित गोशाला का हाल बेहाल है। चिलचिलाती धूप व लू के बीच गोशाला के अंदर एक महिला सोती मिलीं, जबकि पास ही कुछ बच्चे खेलते नजर आए। गोशाला में करीब 80 छोटे बड़े गोवंश संरक्षित हैं। पशुओं के लिए बना एक टिनशेड पूरी तरह टूटा मिला। गोवंश धूप में खड़े होने को मजबूर हो रहे थे। जबकि पेयजल का कहीं पर हौज ही नहीं दिखा। पूरे परिसर में गोबर फैला मिला। यानी गंदगी में तब्दील था। मौके पर एक भी केयर टेकर मौजूद नहीं था।
वर्जन-
गोशालाओं में पानी और छाव के पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश सभी को दिए गए थे। इसकी लगातार मॉनीटरिंग भी हो रही है। फिर भी जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई होगी।
आलोक कुमार, जिला विकास अधिकारी